रतजगों की थकन

सत्याधार (युवा गीतकार)-


बात बेबात पर दरकिनारी हुई ।
बेवजह बात उनसे हमारी हुई ॥

चन्द नगमें गढ़े, चन्द गजलें कही ।
इस तरह से खतम उम्र सारी हुई ॥

यूँ तो दफ्तर पहुँचता हूँ मैं वक्त पर ।
फिर भी नोटिस मेरे नाम जारी हुई ॥

वो किसी और के हो गये बे-सबब ।
मेरे ख्वाबों पे ही पहरेदारी हुई ॥

कहने को तो सफलता ने चूमें कदम ।
फिर भी असफल जनों में शुमारी हुई ॥

रतजगों की थकन वो बताये किसे ?
ज़िसको रातें मिली हों गुजारी हुई ॥