क़ुद्रत का क़ानून! विधि का विधान! ईश्वर की माया : कहीं धूप-कहीं छाया!

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

यह लोक विचित्रता से युक्त है; कहीं दिन मे ‘रात’ है तो कहीं रात मे ही ‘दिन’ है।

अब देखिए न, ऊपर जो चित्र दिख रहा है, वह किसी बच्ची का नहीं है, जबकि वह पाँच-छ: वर्ष की बच्ची-जैसी दिख रही है। वास्तव मे, वह तो एक किशोरी है, जिसकी अवस्था (यहाँ ‘आयु’ अशुद्ध है।) १७ वर्ष की है। उसका नाम ‘सोनाली’ है।

सोनाली मध्यप्रदेश-राज्य के ‘बड़वानी’ जनपद/जिला की निवासिनी है। उसके शरीर की ऊँचाई २ फ़ीट ३ इंच है। गर्भावस्था के समय मा को स्वस्थ आहार न दिये जाने के कारण प्राय: शिशु मे ऐसी विकृति देखी गयी है। यहाँ भी वैसा ही लगता है। इसप्रकार कुपोषण से ग्रस्त (‘ग्रसित’ अशुद्ध है।) ‘सोनाली’ अब एक वैश्विक कीर्तिमान रचने जा रही है; कारण कुछ भी रहा हो।

जहाँ तक मै समझता हूँ, इतनी कम ऊँचाईवाली लड़की विश्व के किसी अन्य देश मे नहीं है। सोनाली को यदि उत्तम शिक्षा-प्रशिक्षा सुलभ करा दी जायें तो वह स्वयं आगे चलकर, किसी फ़िल्म, सर्कस तथा अन्य जनसंचार-माध्यम का एक सुदृढ़ आकर्षण-केन्द्र बन सकती है। चूँकि वह अति निर्धन-परिवार की सदस्या है अत: ससम्मान अपना और अपने घरवालों की जीवनशैली सुदृढ़ कर सकती है।

आवश्यकता है, उसके परिवारवालों को समुचित ढंग से समझाने की।

(सर्वाधिकार सुरक्षित― आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १३ जून, २०२३ ईसवी।)