सीजन है आम का,
डगरू के काम का ।
पहली बार लेना स्वाद,
इसको बहुत भाता है ।
आम लोगों के पास,
आम लोगों में खास ।
फलों का राजा,
अपनी रानी को बुलाता है ।।
देश में होने वाला,
देशी ही होता है।
विक्रेता लेकिन,
कई नामों से बुलाता है ।।
लेता स्वाद जीभ से,
और बताता है, आंखों से।
तुम भी तो जान लो,
मौन मुसकाता है ।।
चूँ – चाँ करता हुआ,
गूँ – गा बताता है ।
क्योंकि डगरूआ को
अभी बोलना नहीं आता है।
आम रस अमृत है,
आम जन स्मृत है।
पाकर एक आम,
‘जी’, धन्य हो जाता है ।।
भूखा हो, या भरा पेट,
मिले तो कम से कम एक
हर कोई आम,
बड़े चाव से खाता है।
एक आम खाकर के,
खास बन जाइए ।
खाने के लिए मित्रों को,
घर पर बुलाइए ।।
आम का पन्ना, और,
आम – शेक दूध वाला ।
मार्केट में लॉंच कर,
ढेर सारे रोज, रुपए कमाइए ।
डगरू अभी बच्चा है,
अकल का कच्चा है ।
विचारों का सच्चा है,
इसकी बातों में आइये ।।
अवधेश कुमार शुक्ला
मूरख हिरदै, मूरखों की दुनिया
12/07/2024