नीट– २०२६ प्रश्नपत्र ‘लीक’ होता रहा और ‘एन० टी० ए०’ सोती रही!..?

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

जब हमे अपने देश मे किसी प्रकार की परीक्षा के प्रश्नपत्र को सम्बन्धित परीक्षा कराये जाने से पूर्व प्रश्नपत्र के लीक कराने की सूचना प्राप्त होती है तब सड़ी-गली व्यवस्था का ख़ाका सामने आने लगता है। मन मे भाव उठने लगते हैँ– व्यक्ति कितना निकम्मा और संस्कार-अनुशासनहीन हो चुका है; नैतिकता के स्तर पर पूरी तरह से पतित हो चुका है कि अपने निकम्मे और निकम्मी बेटे-बेटियोँ को डॉक्टर के रूप मे देखने के लिए सारी लोक-मर्यादा खो चुका है; उस पर तुर्रा यह कि देश की सरकार अपनी आँखोँ के सामने सब कुछ घटते हुए देखकर भी लीपा-पोती करने मे लग जाती है। जब सम्बन्धित विभाग के मन्त्री से त्यागपत्र की माँग की जाती है तब देश के रक्षामन्त्री राजनाथ सिंह का यह बयान बेशर्मी के साथ हवा मे तैरने लगता है :– ”हमारी सरकार मे इस्तीफ़े नहीँ होते; वह यू० पी० ए० की सरकार मे होता था। यह एन० डी० ए० की सरकार है; कोई मन्त्री इस्तीफ़ा नहीँ देगा।” यदि हम कथित रक्षामन्त्री के बयान का निष्कर्ष निकालेँ तो नैतिकता और उत्तरदायित्व से यू० पी० ए० (संयुक्त प्रगतिशील गठबन्धन)-सरकार बँधी हुई थी, जबकि एन० डी० ए० (राष्ट्रीय जनतान्त्रिक गठबन्धन)-सरकार इन बन्धनो से स्वयं को मुक्त करती दिख रही है। शिक्षक ने यह भी लिखा था :– इस प्रकरण की जाँच किसी स्वतन्त्र एजेंसी से करायी जानी चाहिए। परिस्थितियाँ दिखाती हैँ कि इसमे अवैध ढंग से प्रश्नपत्र तक एक्सेस, उसका सर्कुलेशन और ट्रांसमिशन सम्मिलित हैँ। अत: मै सम्मानपूर्वक अनुरोध करता हूँ कि कथित पेपर-लीक की तुरन्त जाँच की जाये।

एन० टी० ए० के पास भेजी गयी इसी शिकायत के बाद से उसके कान खड़े हो गये। उसने केन्द्रिय एजेंसियोँ को सतर्क किया; तत्पश्चात् जाँच की ज़िम्मादारी राजस्थान एस० ओ० जी० और सी० बी० आइ० को सौँपी गयी थी।

 आइए! अब हाल ही मे 'नीट– २०२६' के प्रश्नपत्र को जिस तरह से लीक कराया गया था और जिसमे भाजपाई नेता फँसते हुए दिख रहे हैँ, उसका तथ्य और तर्कसहित विश्लेषण करेँ।

‘नीट– २०२६’ के शर्मनाक घोटाले का पर्दाफ़ाश कैसे हुआ?

   बताया जाता है कि एक विद्यार्थी ने सीकर, राजस्थान-स्थित एक निजी कोचिंग-केन्द्र 'जी० सी० आइ०' के रसायनविज्ञान के शिक्षक शशिकान्त सुथार के ह्वाट्सऐप्प पर एक 'सम्भावित प्रश्नपत्र' भेजा था, जो वास्तविक प्रश्नपत्र-जैसा दिख रहा था। उसे देखते ही भौतिकविज्ञान के उस शिक्षक का माथा ठनका। फिर क्या था! ४ मई विलम्ब रात्रि मे डेढ़ बजे के लगभग नीट (यू० जी०)– २०२६ की समाप्ति के कई घण्टे के पश्चात् एक ऐसा बवण्डर आया, जो थामते नहीँ थम रहा था। 
सीकर, राजस्थान का उक्त शिक्षक कुछ दस्तावेज़ के साथ उदयपुर थाने मे रिपोर्ट लिखाने पहुँचे; परन्तु उन्हेँ वहाँ से टरका दिया गया था। वहाँ के एस० एच० ओ० राजेश कुमार ने 'इण्डियन एक्सप्रेस' को बताया था कि वह शिक्षक अपने साथ कुछ दस्तावेज़ लेकर आये थे, जो हाल ही मे सम्पन्न हुई नीट मे गड़बड़ी का आरोप लगा रहे थे। उन्होँने यह भी बताया कि थाने मे उपस्थित पुलिसकर्मियोँ ने उनकी बात सुनी और उन्हेँ ख़ाली काग़ज़ देकर लिखित शिकायत दिये ही चले गये थे, जबकि शिक्षक शशिकान्त एस० एच० ओ० राजेश कुमार के उस कथन को सिरे से ख़ारिज़ कर दिया था। इसके बावुजूद शशिकान्त ने हार नहीँ मानी थी। उन्होँने शिकायती पत्र के साथ एन० टी० ए० की वेबसाइट पर उस संदिग्ध प्रश्नपत्र को डाल दिया; फिर क्या था, दिल्ली से राजस्थान के डी० जी० पी० (डाइरेक्टर जनरल पुलिस)-कार्यालय तक हड़कम्प मच गया। यद्यपि प्रश्नपत्र-लीक की घटना दो सप्ताह पहले ही मिल चुकी थी तथापि  राजस्थान-सरकार 'काले कारनामे' को छिपाने मे लगी रही, जिसके कारण एफ० आइ० आर० तक नहीँ लिखी जा सकी। शशिकान्त ने हार नहीँ मानी। ३ मई की शाम उनके मकान-मालिक ने एक हस्तलिखित सम्भावित प्रश्नपत्र दिखाया था, जिसे उसके बेटे ने केरल से भेजा था। उसने उसे जब शिक्षक को दिखाया तब उन्हेँ और बल मिला; क्योँकि उसमे दिख रहे कई प्रश्न नीट के प्रश्नपत्र मे शामिल थे।
 
अन्तत:, शशिकान्त ने ७ मई की रात्रि मे ९-१० के मध्य अपनी सप्रमाण शिकायत एन० टी० ए० के पास भेज दी थी, जिसमे ६० पृष्ठोँ की पी० डी० एफ० थी, जो हस्तलिखित थी। उसमे रसायनविज्ञान के ९० और जीवविज्ञान के प्रश्न ७-८ पृष्ठोँ मे थे। उस शिक्षक ने बुद्धिमत्ता का परिचय देते हुए 'इण्डियन एक्सप्रेस' को भी इस तथ्य से अवगत कराते हुए, उस समाचारपत्र मे अपना कथन प्रकाशित करा दिया था :– मै अपना मोबाइल फॉरेँसिक परीक्षण कराने के लिए तत्पर हूँ, जिसका मेरे पास सारे प्रमाण हैँ। नीट की गम्भीरता और महत्ता को देखते हुए, ऐसे कृत्योँ का विद्यार्थियोँ के जीवन पर गहरा असर पड़ सकता है।
 
इसके बाद से एन० टी० ए० हरकत मे आयी और सरकारी एजेंसियोँ को सतर्क किया। उसके बाद प्रकरण की जाँच राजस्थान-पुलिस की एस० ओ० जी (स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप) और सी० बी० आइ० को सौँप दी थी।
  
अभी तक जो जाँच हुई है और उससे जो परिणाम निकला है, वह बहुत चौँकानेवाला लग रहा है। ज्ञात हुआ है कि प्रश्नपत्र  के रूप मे ₹४० लाख लिये गये थे। इस प्रकरण मे एस० ओ० जी० ने अबतक लगभग १७० अभ्यर्थियोँ से पूछताछ की है, जबकि सी० बी० आइ० ने ठोस साक्ष्य के आधार पर अब तक कई आरोपितोँ की गिरिफ़्तारी की है। राजस्थान पुलिस की एस० ओ० जी० ने सबसे पहले उस कथित सम्भावित प्रश्नपत्र को बरामद किया था, जिसे परीक्षा से ४८ घण्टे पहले ही वायरल कर दिया गया था। जाँच-परिणाम के अनुसार, उस वायरल पेपर मे ४१० प्रश्न थे, जिनमे से १३५ प्रश्न वही थे, जो नीट– २०२६ के प्रश्नपत्र मे शामिल किये गये थे। इससे एक बात सुस्पष्ट हो गयी है कि वह न तो 'संयोग' था, न 'प्रयोग', बल्कि एक 'संघटित चोरी' थी। वह प्रश्नपत्र हज़ारोँ अभ्यर्थियोँ तक पहुँच चुका था। गहन पूछ-ताछ के आधार पर यह तथ्य सामने आया है कि प्रश्नपत्र-चोरोँ के तार राजस्थान, हरियाणा, महाराष्ट्र और बिहार के गैंग से जुड़े हुए हैँ।
 
सी० बी० आइ० की जाँच मे चौँकानेवाला एक खुलासा यह हुआ है कि प्रश्नपत्र-लीक कराने की साज़िश कई माह-पूर्व ही रची जा चुकी थी। मुख्य आरोपितोँ को नवम्बर, २०२५ ई० मे ही इस बात का आश्वासन दे दिया गया था कि नीट– २०२६ का प्रश्नपत्र उन्हेँ उपलब्ध करा दिया जायेगा। सी० बी० आइ० ने अपना शिकंजा कसते हुए, सीकर-निवासी माँगीलाल बिवाल, दिनेश बिवाल, विकास बिवाल और यश यादव को गिरिफ़्तार कर लिया। जाँच से ज्ञात हुआ कि उक्त संघटित अपराध का केन्द्र सीकर (राजस्थान) रहा है। आरोपित विकास विबाल और यश यादव एक ही कोचिंग-केन्द्र के विद्यार्थी थे, जिनके बीच साँठगाँठ शुरू हुई थी।

‘नीट’ के काले अध्याय के काले कारोबार से जुड़ा सीकर का विबाल-परिवार!

 सीकर का एक परिवार ऐसा है, जो लगातार प्रश्नपत्र-लीक-काण्ड मे फँसता आ रहा है; परन्तु दुस्साहस ऐसा कि अपने परिवार और रिश्तेदारोँ के कुपात्र बेटे-बेटियोँ को देश के प्रमुख मेडिकल कॉलेजोँ मे प्रवेश दिला चुके हैँ। सी० बी० आइ० की जाँच के दाइरे उन तक भी पहुँच चुकी है। सानिया विबाल दिनेश विबाल की भतीजी है, जो बॉम्बे मेडिकल कॉलेज मे है, जबकि पलक दिनेश की दूसरी भतीजी है। प्रकृति, माँगीलाल विबाल की बेटी दौसा मेडिकल कॉलेज मे पढ़ रही है और बेटे विकास विबाल को सवाई माधोपुर मेडिकल कॉलेज मिला हुआ है। अब सी० बी० आइ० इस बात की जाँच करने मे जुटी है– क्या इन सबको पेपर-लीक के ज़रिये प्रवेश मिला है? सच यह है कि जब नीट– २०२५ का प्रश्नपत्र सीकर मे लीक हुआ था तब इसी परिवार के मुखिया माँगीलाल विबाल की गिरिफ़्तारी की गयी थी और इस बार की परीक्षा मे उसी परिवार का भी नाम सामने आया है।

 जब जाँच-एजेंसियोँ ने एक तार को दूजे तार से जोड़ना शुरू किया है तब सामने आया है कि सबसे पहले प्रश्नपत्र महाराष्ट्र के अहिल्याबाई नगर-निवासी धनंजय के पास पहुँचाया गया था। धनंजय ने उसे नासिक के शुभम खैरनाक को, शुभम ने यश यादव और यश यादव ने सीकर-निवासी माँगीलाल विबाल और दिनेश विबाल को उपलब्ध कराये थे।
सी० बी० आइ० की जाँच जारी है।

(क्रमश:)