मेरे मित्र अरशद (Arshad Siddiqui) ने आज एक बेहतरीन सुझाव दिया है। ये सुझाव भी उनके दिमाग में तब आया जब उनकी एक मित्र ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई। उसने बताया कि कैसे शादी के बाद से उसे शारीरिक व मानसिक रूप से ससुराल पक्ष की ओर से प्रताड़ित किया जा रहा है।
अरशद जी ने बताया कि जिस प्रकार किसी किरायेदार का पुलिस वैरिफिकेशन होता है उसी तर्ज पर अगर युवाओं का सोशल बिहेवियरल वैरिफिकेशन हो जिसमें कि प्रधान से लेकर पास पड़ोस के करीब दस लोगों के हस्ताक्षर हों तभी वह लड़का विवाह योग्य माना जाएगा। यदि वह लव मैरिज करे अथवा उसकी मैरिज अरैंज हो बिना इस वैरिफिकेशन के उसका विवाह ना हो-ना कोई लड़की उससे विवाह करे। उसकी सारी योग्यताओं में एक योग्यता सोशल बिहेवियरल की भी हो। यदि ऐसा होने लगे तो युवा न सिर्फ अपना सोशल बिहेवियर ठीक रखने की कोशिश करेगा बल्कि पास पड़ोस से भी एक सौहार्द्यपूर्ण रिश्ते बनेंगे। इससे भी बड़ी बात कि यदि कोई लड़की विवाहित होकर नए घर में जाएगी तो उसकी सुरक्षा की गारंटी भी एकहद तक होगी। इस नई पहल की शुरुआत सरकार भरोसे नहीं बल्कि स्वयं के स्तर पर किया जाए तो ज्यादा बेहतर होगा।
सन्तोष राॅय की फेसबुक वाॅल से साभार