दीपक कुमार श्रीवास्तव –
कछौना (हरदोई) – उत्तर रेलवे के बालामऊ जंक्शन रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में सवार युवक का पैर फिसलने से वह ट्रेन की चपेट में आ गया, जिसमें उसका दाहिना पैर कट गया । सूचना पर पहुंची जीआरपी व आरपीएफ के द्वारा एंबुलेंस की सहायता से गंभीर रूप से घायल युवक को उपचार हेतु सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कछौना भेजा गया, जहां हालत गंभीर देखते हुए ट्रामा सेंटर लखनऊ रेफर कर दिया गया ।
बालामऊ जंक्शन रेलवे स्टेशन के चौकी प्रभारी द्वारा मिली जानकारी के अनुसार युवक दिलीप कुमार (25) पुत्र रामधनी निवासी जगदीशपुर थाना डीह रायबरेली अपने छोटे भाई विजय कुमार व अन्य दो साथियों के साथ लुधियाना से रोजी रोटी कमाकर ट्रेन नंबर 13308 डाउन ( किसान एक्सप्रेस ) से अपने घर वापस लौट रहा था । शुक्रवार को सुबह ट्रेन के बालामऊ जंक्शन रेलवे स्टेशन पर ठहराव के बाद ट्रेन चलने के दौरान बालामऊ जंक्शन स्थित आरपीएफ चौकी के सामने प्लेटफार्म नंबर एक पर युवक का पैर फिसलने से वह ट्रेन की चपेट में आ गया और उसका दायां पैर घुटने के नीचे से से कट गया । जीआरपी व आरपीएफ ने तत्परता दिखाते हुए एंबुलेंस के माध्यम से घायल युवक को उपचार हेतु सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कछौना भिजवाया । जहां युवक के प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर देखते हुए चिकित्सक ने ट्रामा सेंटर लखनऊ रेफर कर दिया ।
वहीं दूसरी ओर घायल युवक के छोटे भाई विजय कुमार की माने तो ट्रेन के जनरल कोच में काफी भीड़-भाड़ थी, उसका बड़ा भाई पेशाब करने के लिए गया था इसी दौरान टॉयलेट से बाहर निकलते वक्त ट्रेन के गेट के पास अचानक धक्का लगने से उसका भाई ट्रेन से नीचे गिरकर ट्रेन की चपेट में आ गया, जिसमें उसका दाहिना पैर कट गया । वहीं कुछ प्रत्यक्षदर्शी लोग इस घटना को आत्महत्या का प्रयास बता रहे हैं ।
ट्रेन के जनरल डिब्बे में सफर सजा से कम नहीं
ट्रेन में चढ़ने और उतरने को लेकर जद्दोजहद, क्षमता से कई गुना अधिक यात्रियों से खचाखच भरे डिब्बे, सीट पर बैठने को लेकर यात्रियों में हो रही तकरार, गेट पर लटके और बैठकर जान जोखिम में डालकर यात्रा कर रहे लोग, बैठने की जगह ना मिलने पर टॉयलेट के पास बैठे लोग, ट्रेन के जनरल डिब्बे में सफर की बात करते ही संवाददाता के जनरल डिब्बों में सफर के अनुभव के अनुसार इन्हीं चित्रों की कल्पना मस्तिष्क सृजित करता है । भीषण गर्मी में ट्रेन के जनरल डिब्बों में यात्रा किसी सजा से कम नहीं है । रेल हादसों में कई लोग खचाखच भरी रेल बोगी में धक्का-मुक्की या ट्रेन में जगह ना होने के कारण गेट पर लटकने की वजह से हादसे का शिकार हो जाते हैं । ट्रेनों में जनरल डिब्बों की कमी के कारण प्रतिदिन एक जनरल डिब्बे में 200-250 यात्री जान जोखिम में डालकर सफर करते हैं । रेलवे को आम आदमी की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ट्रेनों में जनरल डिब्बों की संख्या बढ़ानी चाहिए । जिससे आम जनमानस की यात्रा सुलभ और जोखिम विहीन हो सके ।