मुबारकपुर से फिर भागे जानवर, प्रशासन ने कहा ग्रामीणों की गलती से हुआ ये

हरदोई- प्रशासन की ओर से किसानों की फसल को आवारा पशुओं से रोकने के लिए की गई व्यवस्था अव्यवस्था की भेंट चढ़ गई है। नयागांव मुबारकपुर में बनाए गए पशु आश्रय स्थल से दूसरी बाद सैंकड़ों की तादाद में जानवर रात में भाग गए। जानवरों ने आसपास खड़ी फसल को नेस्तनाबूद कर दिया। इसको लेकर किसान परेशान है तो प्रशासन ग्रामीणों की गलती मान रहा है।

शासन के निर्देश पर किसानों को आवारा खुला घूम रहे जानवरों से राहत दिलाने की दिशा में बेहद अच्छा कदम उठाया गया। जिसके अंतर्गत आवारों जानवरों को पशु आश्रय स्थलों का निर्माण कराते हुए उनमें बंद कर दिया गया। इसके साथ ही ग्रामीण अंचलों में पुलिस की मदद से पहुंचकर ग्रामीणों को अपने-अपने जानवर बांध कर रखने की अपील की गई। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बेहद अलग हो गई। जहां एक ओर एक तादाद से अधिक जानवरों को इन आश्रय स्थलों में नहीं रखा जा सकता तो वहीं आश्रय स्थलों पर तैनात जिम्मेदारों की लापरवाही भी सामने आ रही है। इसके चलते इनसे निकलकर बड़ी तादाद में जानवर फसलों को चौपट कर रहे हैं।

बीते दिनो जिले में बनाए गए कई पशु आश्रय स्थलों से जानवरों के भाग जाने की खबरें आई। लेकिन प्रशासन ने इसे संजीदगी से नहीं लिया। इसी कड़ी में अभी कुछ दिन पूर्व लखनऊ मार्ग पर नयागांव मुबारकपुर के समीप पशु आश्रय स्थल में बंद सैंकड़ों की तादाद में जानवर भाग गए। जिन्होने किसानों की फसलों को चौपट कर दिया। इसके बावजूद प्रशासन नहीं चेता। जिसका नतीजा गणतंत्र दिवस के दौरान देखने को मिला। इसी आश्रय स्थल से रात में सैंकड़ों की तादाद में जानवर भाग निकले और आसपास खड़ी किसानों की कई बीघा फसल चौपट कर दी। इसको लेकर इलाके के अन्नदाता आंसू बहा रहे हैं तो प्रशासन आरोप इलाकाई लोगों पर लगा रहा है।

जानवरों की देखभाल करने वालों की खामी को न देखते हुए प्रशासन के जिम्मेदारों का कहना है कि रात में कुछ ग्रामीण चोरी छिपे अपने जानवर इस आश्रय स्थल में छोड़ने आए। जिसकी वजह से दरवाजा खोला गया। इसके कारण अन्य बंद जानवर मौका पाकर भाग निकले। इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रशासन किसानों की इस समस्या के प्रति कितना गंभीर है। किसानों पर जहां एक ओर मौसम की मार तो पड़ रही है वहीं प्रशासन भी उनको खून के आंसू रूला रहा है।