अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के मौके पर प्रशासन ने वाहवाही लूटने के चलते की लापरवाही तो एक मासूम ने तोड़ दिया दम

ब्यूरो हरदोई-

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बात बीते 11 अक्टूबर की है जब हरदोई ज़िला प्रशासन के कई बड़े अधिकारी अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस मनाने के लिए गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने की ओर बढ़ रहे थे , बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ के संदेश देने हेतु जी. आई. सी. परिसर में हरदोई बी.एस.ए. हेमंत राव व डी. आई. ओ. इस. बी.के. दुबे के आदेश पर 11 हज़ार छात्राओं को बुलाया गया था।

सुबह 9 बजे से सभी छात्राएं जी आई सी परिसर में एकत्र हो गईं थीं हरदोई डीएम दिल्ली वापसी से देर होने के कारण 5 घंटे तक छात्राओं को कड़ी धूप में ही बिठाए रखा गया, न पानी की व्यवस्था न धूप से बचने की न ही बच्चों के बीमार होने से बचने के लिए जिला प्रशासन की कोई व्यवस्था दिखी।

ज़िला प्रशासन जहां एक ओर गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड में अपना नाम दर्ज़ कराने की होड़ में था वहीं दूसरी ओर कई बच्चे कड़ी धूप से परेशान होकर बेहोश हो रहे थे तो वहीं एक बच्ची की हालात इतनी बिगड़ी की उसने देर रात अपना दम तोड़ दिया,

एक ओर डीएम पुलकित खरे बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का संदेश जिस मंच से दे रहे थे वहां पानी भी था और धूप से बचने के लिए टेंट भी दूसरी ओर जो छात्राएं उसका हिस्सा थीं न उनके लिए टेंट की व्यवस्था न पानी की तो कैसे माने की डीएम का यह संदेश बेटियों के लिए विचार धारा बदलने के लिए था या उसी विचार धारा का इतिहास रचने के लिए जिला प्रशासन के लिए छात्रा ने अपनी कुर्वानी दे दी।

शहर की पिहानी चुंगी स्थित आर्य कन्या पाठशाला की कक्षा 9 की छात्रा सुप्रिया शर्मा भी ज़िला प्रशासन का मान बढ़ाने विद्यालय से ले जाई गई और कड़ी धूप में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के संदेश वाले ही कार्यक्रम से ठीक बाद जिला अस्पताल में दम तोड़ दिया, अब सवाल ये है क्या ज़िला प्रशासन उस पिता की दहलीज पर दुःख बांटने जाएगा जिसकी बेटी ने प्रशासन के कार्यक्रम का हिस्सा बनी और फिर चंद घंटो बाद कड़ी धूप के चलते बीमार होकर अपना दम तोड़ दिया, फ़िलहाल डॉक्टरों ने अभी मृत्यु का कारण स्पष्ट नहीं किया लेकिन सुप्रिया के पिता सीधे तौर पर ज़िला प्रशासन को आरोपित कर कटघरे में खड़ा कर रहे हैं

सवाल ये भी है कि छात्रा की मौत की जिम्मेदारी आख़िर लेगा कौन, डीएम , बी एस ए, डी आई ओ एस , विद्यालय की प्रिंसिपल या फिर कोई अन्य?

सवाल ये भी है कि जिस पिता ने बेटी खोई क्या अब उसके लिए बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ जैसे संदेश मायने रखते हैं? सवाल कई हैं पर जवाब कोई देने वाला नज़र नहीं आता।

सवाल ये भी है कि आख़िर ज़िला प्रशासन ने लापरवाही क्यों कि सवाल ये भी है कि क्या इसकी जिम्मेदारी कोई लेगा सवाल ये भी है कि क्या इस घटना की कोई जांच भी होगी, क्योंकि अधिकारियों ने इस घटना के सम्बंध में अबतक चुप्पी बांध रखी है, अब देखना ये होगा कि जिस ज़िला प्रशासन की लापरवाही के चलते छात्रा ने अपना दम तोड़ा वो उसके लिए क्या करता है ?