रचनाकारों को सजग करती कृति ‘जैसा लिखा वैसा छपा’

‘साहित्यांजलि प्रज्योदि’ के तत्त्वावधान मे भाषाविज्ञानी-समीक्षक आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय-द्वारा सम्पादित ‘विश्व की प्रथम असंशोधित साहित्यिक कृति कविता-संग्रह ‘जैसा लिखा वैसा छपा’ का सारस्वत सभागार’, लूकरगंज, प्रयागराज मे २८ अगस्त को लोकार्पण किया गया।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए गीतकार प्रद्युम्ननाथ तिवारी ‘करुणेश’ ने बताया, “कृति ‘जैसा लिखा वैसा छपा’ की आद्योपान्त रचनाएँ पढ़ीं। कुछ रचनाएँ ऐसी दिखीं, जो हृदय को छू गयीं। इन रचनाओं को पढ़ते हुए मेरे नयनो से अश्रु प्रवाहित हो उठे। यह कविता की सार्थकता है कि पाठक कविता पढ़कर द्रवीभूत हो जाये।”
समारोह के मुख्य अतिथि प्रतापगढ़ से पधारे साहित्यशिल्पी डॉ० दयाराम मौर्य ने कहा, “आज का लोकार्पण-समारोह ऐतिहासिक है। ‘जैसा लिखा वैसा छपा’ विश्व की प्रथम असंशोधित कृति है; जो कि साहित्य-जगत् को प्रेरक संदेश देती है। साहित्यकार को हमेशा अपनी रचनाओं को सारगर्भित और हर दृष्टि से पूर्ण करने का प्रयास करना चाहिए।”
‘जैसा लिखा वैसा छपा’ के सम्पादक आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने बताया, “जब मुझे रचनाकारों की रचनाएँ उपलब्ध करायी गयी थीं तब मैने उन सभी पर दृष्टि दौड़ायी, उसके पश्चात् यही निर्णय किया कि सभी रचनाओं को ज्यों-के-त्यों ही प्रकाशित करानी चाहिए, ताकि सम्बद्ध रचनाकार और अन्य कवि-कवयित्री भविष्य मे रचनास्तर पर सजग दिखेंगे।”
साहित्यकार और संयोजक डॉ० प्रदीप चित्रांशी ने कहा, “लोकार्पित कृति साहित्य-जगत् को शब्दानुशासन को जोड़ते हुए, एक नये पौध का रोपण करती दिखायी देती है। साहित्य-जगत् की यह पहली कृति होगी, जिसने शब्दानुशासन और छन्दानुशासन को एक मंच पर अपनी बात करने के लिए आमन्त्रित करती प्रतीत होती है।”
डॉ० रवि मिश्र ने समारोह का संचालन किया था।
इसी अवसर पर कविता-मुशाइरा का भी आयोजन किया गया था, जिसमे असलम ‘आदिल’ इलाहाबादी, पं० राकेश मालवीय ‘मुस्कान’, सरिता मिश्र, उर्वशी उपाध्याय, केशव सक्सेना, श्रीनाथ मौर्य ‘सरस’, प्रेम कुमार त्रिपाठी, एस० पी० श्रीवास्तव, फरमूद, इलाहाबादी, सेलाल इलाहाबादी, नज़र इलाहाबादी, अनिल सिंह ‘शलभ’, मोहिनी कुमारी, बेचनलाल गुप्ता ‘विनोदी’, लखन प्रतापगढ़ी, मुक्तक सम्राट् पाल प्रयागी, राजेश ‘राज’, मदन कुमार, कुँवर तौक़ीर अहमद ख़ान आदि कवि-कवयित्रियों ने विविध रस मे सराबोर अपने रचनापाठ से श्रोताओं को सम्मोहित करते दिखे।
इस अवसर पर ज्योति चित्रांशी, रणविजय निषाद, प्रिया, प्रेमसेन आदि साहित्यप्रेमी उपस्थित थे।