उत्तरप्रदेश की कोख में ‘क्रान्ति’ का बीज बो दो!

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय-


उत्तरप्रदेश में सफल बी०एड्०, बी०टी०सी०, कर्मचारी चयन आयोग, उत्तरप्रदेश लोकसेवा आयोग के अभ्यर्थीगण की आवाज़ को बहरी-गूँगी सरकार तक पहुँचाने के लिए हम योजनाबद्ध ढंग से अब एक अप्रत्याशित और अभूतपूर्व क्रान्ति करना चाहते हैं। उस क्रान्ति के माध्यम से उत्तरप्रदेश राज्य के शिक्षित अनियोजित (बेरोज़गार) युवा-वर्ग शक्ति-प्रदर्शन कर, अकर्मण्य शिक्षाधिकारियों, आयोग-अधिकारियों, कर्मचारी चयन आयोग के अधिकारियों, शिक्षामन्त्रियों, मुख्य मन्त्री, प्रधान मन्त्री आदिक को ‘कुम्भकर्णी निद्रा’ से जाग्रत करेंगे। घटिया शिक्षा-परीक्षापरिणाम-नीति के विरुद्ध अब आग उगलने का समय आ चुका है।
उक्त आयोजन में इलाहाबाद के सजग बुद्धिजीवी-वर्ग का प्रतिनिधित्व रहेगा। हमारा यह आयोजन पूर्णत: शान्तिपूर्ण होगा परन्तु केन्द्र और उत्तरप्रदेश-सरकारों की चूलें हिलाकर रख देगा।
हमारा आन्दोलन ‘चन्द्रशेखर आज़ाद-प्रतिमास्थल’
(कम्पनी गार्डन, इलाहाबाद) से आरम्भ होकर लोकसेवा आयोग, उत्तरप्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद्, उत्तरप्रदेश शिक्षा निदेशालय, कर्मचारी चयन आयोग, माध्यमिक चयन आयोग आदिक भ्रष्ट शैक्षिक संस्थानों से होकर सुभाष चन्द्र बोस चौराहा, इलाहाबाद में आकर समाप्त होगा। उस चौराहे पर सभी अभ्यर्थीगण अग्नि को साक्षी मानते हुए, यह संकल्प करेंगे कि वे अगले चुनावों में गूँगी-बहरी ‘भारतीय जनता पार्टी’ की सरकार को उखाड़ फेंकेंगे ताकि जिस दल की सरकार बने, वह बहरी-गूँगी बनने की धृष्टता न कर सके।
भ्रष्ट सरकार के पास विधायकों, सांसदों, मन्त्रियों के वेतन-भत्ते देने के लिए रुपये हैं परन्तु सफल अभ्यर्थियों को नियुक्त करने और देश में विभिन्न सरकारी क्षेत्रों में लाखों रिक्त पदों को भरने की कोई चिन्ता नहीं है; वहीं अवैध तरीक़े से परीक्षण करने-करानेवालों और रिश्वत लेकर नियुक्ति करनेवाले भ्रष्ट अधिकारियों के विरुद्ध सरकारें उच्चस्तरीय कार्रवाई करने से क्यों बचती आ रही हैं। कहीं ऐसा तो नहीं, इस निन्दनीय खेल में सरकारों की भागीदारी है?
अब समय आ गया है, देश के युवावर्ग को धर्म, जाति, वर्गादिक की खोल से बाहर आकर एकजुट होकर अपनी आवाज़ उठानी होगी।
अभी हम उत्तरप्रदेश में युवा-क्रान्ति ‘हमें हमारा अधिकार दो’ आरम्भ करना चाहेंगे किन्तु यह तभी सम्भव है जब उत्तरप्रदेश की युवाशक्ति ‘तन-मन-धन’ के साथ इस आन्दोलन में अपनी सहभागिता करेगी।
हमें यहाँ युवावर्ग की सहभागिता की स्वीकृति चाहिए।
कितनी शिक्षित बेरोज़गार युवक-युवतियाँ इस क्रान्ति की संवाहक बनना चाहती हैं? हमें अभी उत्तर चाहिए।


(इस आह्वान को हर जगह पहुँचाइए।)