शर्म करो बेटी को पढ़ाने का सन्देश देनेवालो!

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय


आज देश में शिक्षा कितनी महँगी कर दी गयी है, यह किसी से छुपा नहीं है। देश की अधिकतर जनता अपने अस्तित्व को बचाये रखने के लिए रात-दिन जी-तोड़ परिश्रम करके एक-एक पैसा जोड़ रही है फिर भी दो वक़्त की रोटी सम्मानपूर्वक नहीं खा पा रही है। ऐसे में, वह अपनी सन्तान को पढ़ाने की बात भला कैसे सोच सकती है? सरकारें वोट की राजनीति चमकाने के लिए कथित धर्म-जाति-वर्गादिक के नाम पर बेटियों को निःशुल्क शिक्षा बाँट रही हैं। मौलाना आज़ाद के नाम पर एक धर्म-विशेष की बेटियों की शिक्षा लिए ख़ज़ाना खोल दिया गया है और देश की जनता को अपने ढपोरी शंख और सरकारी भोंपू ‘आकाशवाणी’ का सहारा लेकर मन की बात सुनाते हुए ”बेटी बढ़ाओ-बेटी पढ़ाओ” का नारा दिया जा रहा है।

देशभर में आये-दिन विद्यालय जा रही बालिकाओं के साथ सरे आम छेड़ख़ानी की जा रही है; उनके साथ शारीरिक दुष्कर्म किया जा रहा है; अपहरण और हत्याएँ की जा रही हैं, परन्तु सत्ताधारी अपने खोल में मस्त दिख रहे हैं।
चुल्लू-भर पानी में डूब मरो देश के शासको! बेटी ‘बेटी’ होती है, न कि हिन्दू , और न मुसलमान। तुमने येन-केन-प्रकारेण सत्ता-अधिग्रहण कर लिया है और उसे बनाये रखने के लिए किसी भी निन्द्य स्तर तक जा भी रहे हो। तुम सभी को बार-बार धिक्कार है।

(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, इलाहाबाद; २५ मार्च, २०१८ ई०)