डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

(प्रख्यात भाषाविद्-समीक्षक)
बउराइ गइल मनवाँ,
अझुराइ गइल मनवाँ।
कबो घाम कबो छाहीं,
खउराइ गइल मनवाँ।
झमझमाझम बूनी,
सझुराइ गइल मनवाँ।
सोझा तहरा होखते,
भहराइ गइल मनवाँ।
आ ओकरा चिंहुकला से
अगराइ गइल मनवाँ।
(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, इलाहाबाल ; ४ जुलाई , २०१५ ईसवी)