संकल्पों का हठ
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– स्वयं पर यदि यहाँ विश्वास हो,तो रास्ते अनजाने नहीं लगते।गिरना भी हार जैसा नहीं लगता,चलते कदम यूँ ही नहीं ठहरते।।मन में यदि दीपक जलता हो,संकल्पों का हठ भी पलता हो।तो काँटों […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– स्वयं पर यदि यहाँ विश्वास हो,तो रास्ते अनजाने नहीं लगते।गिरना भी हार जैसा नहीं लगता,चलते कदम यूँ ही नहीं ठहरते।।मन में यदि दीपक जलता हो,संकल्पों का हठ भी पलता हो।तो काँटों […]