प्रयागराज। पिछले पाँच दिनो से देश और देश से बाहर के भाषा-व्याकरण तथा साहित्य के विशेषज्ञोँ ने लगातार छात्र-छात्राओँ का हर स्तर पर परीक्षा-विषयक मार्गदर्शन करते रहे। २३ जून को मौखिक परीक्षण-कर्मशाला का अन्तिम दिन था। ‘हिन्दी-संसार’ नामक शैक्षणिक संस्था के सभाकक्ष मे भाषा-व्याकरण तथा साहित्य-मर्मज्ञोँ ने हिन्दीसाहित्य-अध्यापन और प्राध्यापन-हेतु साक्षात्कार-परीक्षा की गहन तैयारी के लिए व्याकरणवेत्ता एवं भाषाविज्ञानी आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की अध्यक्षता मे आयोजित कर्मशाला मे भाषा, भाषाविज्ञान तथा साहित्य-विषय पर विद्वज्जन ने छात्र-छात्राओँ का गम्भीरतापूर्वक परीक्षोपयोगी मार्गदर्शन किया।
इस अवसर पर २३ जून को सर्वप्रथम विशेषज्ञमण्डल के अध्यक्ष एवं सदस्योँ प्रो० रामसुधार सिँह, आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रो० मुश्ताक अली तथा डॉ० अशोक स्वामी को भव्य स्मृतिचिह्न, बैग और एक-एक व्याकरणीय और साहित्यिक पुस्तकोँ का सेट भेँट करते हुए, उनका सारस्वत सम्मान किया गया।
यू० पी० कॉलेज, वाराणसी के पूर्व हिन्दीविभागाध्यक्ष प्रो० रामसुधार सिँह ने मुख्य अतिथि के रूप मे कहा– हिन्दी भारत की राष्ट्रभाषा और भारतीय गौरव की प्रतीक है। हिन्दी के विद्यार्थी को हिन्दी-साहित्य के आदिकाल से लेकर समसामयिक साहित्य की विविध प्रवृत्तियोँ को जानना आवश्यक है।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व हिन्दीविभागाध्यक्ष प्रो० मुश्ताक अली ने विशिष्ट अतिथि के रूप मे कहा– पिछले चार दिनो से विद्यार्थियोँ से रूबरू होने और साक्षात्कार के लिए तैयारी करवाने के क्रम मे मुझे यह अनुभव हुआ कि वस्तुनिष्ठ प्रश्नो पर उनकी पकड़ बहुत अच्छी है और मौखिक परीक्षा के लिए थोड़ी और मिहनत करने की ज़रूरत है।
समारोह-अध्यक्ष आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने काव्यशास्त्र के सिद्धान्त के अन्तर्गत पाश्चात्य काव्यशास्त्र के प्रमुख सिद्धान्तकारोँ प्लेटो, अरस्तू, होरेस, कॉलरिज, लॉजाइनस इत्यादिक के सिद्धान्तोँ से सम्बन्धित प्रश्न किये थे। इनके अतिरिक्त उन्होँने संस्कृत से हिन्दी और हिन्दी से संस्कृत-अनुवाद करने के लिए कई वाक्य लिखाये थे। आचार्य ने विद्यार्थियोँ को अनुवाद का अर्थ बताते हुए, उसके नियमो से अवगत कराया। उन्होँने भाषाविज्ञान के अन्तर्गत अर्थविज्ञान, भाषा के विविध रूप, भाषा की विशेषताओँ, भाषा कहने से किन तत्त्वोँ का बोध होता है, इसे बताया और समझाया।
आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने बताया– विद्यार्थी मौखिक परीक्षा का सामना तब कर सकते हैँ जब उनके चेहरे पर आत्मविश्वास झलके और प्रत्येक प्रश्न के उत्तर देने के बाद उनमे उसके विषय मे प्रवेश करने की क्षमता हो; क्योँकि परीक्षक यह जानना चाहता है कि अमुक परीक्षार्थी की तैयारी किस कोटि की है।
कर्मशाला का संयोजन डॉ० अशोक स्वामी ने कहा– जब आप किसी साक्षात्कार-परीक्षा की तैयारी कर रहे होते हैँ तब प्रत्येक विषय से सम्बन्धित प्रश्नो के उत्तर को विस्तार मे समझना होता है; क्योँकि परीक्षक कहीँ से भी प्रश्न कर सकता है। कर्मशाला का संयोजन डॉ० अशोक स्वामी और संचालन प्रभाकर पाण्डेय ने किया।
इस आयोजन मे ब्रजकिशोर भँवरनाथ यादव, पंकज मिश्र, आयुषी, नेहा, रजनीश, लक्ष्य इत्यादिक की व्यवस्थागत महती भूमिका रही।