प्रयागराज। २२ जून को ‘हिन्दी-संसार’ नामक शैक्षणिक संस्था के सभाकक्ष मे भाषा-व्याकरण तथा साहित्य-मर्मज्ञोँ ने हिन्दीसाहित्य-अध्यापन और प्राध्यापन-हेतु साक्षात्कार-परीक्षा की गहन तैयारी के लिए व्याकरणवेत्ता एवं भाषाविज्ञानी आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की अध्यक्षता मे आयोजित कर्मशाला मे भाषा, भाषाविज्ञान तथा साहित्य-विषय पर विद्वज्जन ने छात्र-छात्राओँ का गम्भीरतापूर्वक परीक्षोपयोगी मार्गदर्शन किया।

साहित्य-विशेषज्ञ प्रो० मुश्ताक अली ने समकालीन कविता, कहानी, निबन्ध, संस्मरण, जीवनी इत्यादिक गद्यात्मक विषयोँ पर कई प्रश्न किये और उन्हेँ समझाया भी। उन्होँने कविता और गद्य-कविता की अवधारणा को विस्तारपूर्वक समझाया।
आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने काव्यशास्त्र के सिद्धान्त के अन्तर्गत पाश्चात्य काव्यशास्त्र के प्रमुख सिद्धान्तकारोँ प्लेटो, अरस्तू, होरेस, कॉलरिज, लॉजाइनस इत्यादिक के सिद्धान्तोँ से सम्बन्धित प्रश्न किये थे। इनके अतिरिक्त उन्होँने संस्कृत से हिन्दी और हिन्दी से संस्कृत-अनुवाद करने के लिए कई वाक्य लिखाये थे। आचार्य ने विद्यार्थियोँ को अनुवाद का अर्थ बताते हुए, उसके नियमो से अवगत कराया। उन्होँने भाषाविज्ञान के अन्तर्गत अर्थविज्ञान, भाषा के विविध रूप, भाषा की विशेषताओँ, भाषा कहने से किन तत्त्वोँ का बोध होता है, इसे बताया और समझाया। कर्मशाला का संयोजन डॉ० अशोक स्वामी ने किया।