लोकसभा ने किया नागरिकता संशोधन विधेयक पारित

लोकसभा ने नागरिकता संशोधन विधेयक पारित कर दिया है। विधेयक का उद्देश्‍य नागरिकता कानून-1955 में संशोधन कर पाकिस्‍तान, बांग्‍लादेश और अफगानिस्‍तान से अवैध रूप से आए हिन्‍दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाइयों को भारतीय नागरिकता का पात्र बनाना है। संशोधन विधेयक में इन तीनों देशों के इन छह धर्मावलम्बियों के लिए निवास की अवधि 11 वर्ष से कम करके छह वर्ष करने का प्रावधान है।

विधेयक पर बहस का जवाब देते हुए गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि केवल असम के लिए नहीं बल्कि पश्चिमी सीमा से आए और राजस्‍थान, पंजाब और दिल्‍ली में बसे प्रवासियों के लिए भी यह विधेयक लाया गया है।

माइनोरिटी कम्‍युनिटीज के माईग्रेंट्स की संकटपूर्ण स्थितियों से निवारण करना। ये वैसे लोग है, जो धार्मिक उत्‍पीड़न के कारण भारत में शेल्‍टर लेने के लिए मजबूर हुये है। इस संशोधन विधेयक के कानून बन जाने के बाद ऐसे माईग्रेंट सिटीजनशिप प्राप्‍त करने के लिए अप्‍लाई कर सकेंगे और उनके आवेदन पर जो निर्धारित प्रोसेस है, उसके अनुसार आवश्‍यक जांच पड़ताल के बाद राज्‍य सरकार की रिकेमेंडेशन पर सेन्‍ट्रल गवर्नमेंट नागरिकता प्रदान करने का भी निर्णय कर लेगी।

इससे पहले विधेयक पेश करते हुए श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार राष्‍ट्रीय नागरिक रजिस्‍टर के लिए वचनबद्ध है। और इसमें किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जायेगा।