विधेयक का उद्देश्‍य ऊंची जातियों में आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को समान अवसर प्रदान करना : थावरचंद गहलोत

लोकसभा ने आज सामान्‍य श्रेणी के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को नौकरियों में सीधी भर्ती और उच्‍च शिक्षण संस्‍थानों में प्रवेश में दस प्रतिशत आरक्षण देने के लिए 124वें संविधान संशोधन विधेयक पर चर्चा शुरू की।

विधेयक पेश करते हुए सामाजिक न्‍याय और अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने कहा कि विधेयक का उद्देश्‍य ऊंची जातियों में आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को समान अवसर प्रदान करना है।

मैं स्‍पष्‍ट भी करना चाहता हूं कि वर्तमान में जो एससी/एसटी और ओबीसी को आरक्षण व्‍यवस्‍था है साढ़े 49 परसेन्‍ट उसमें किसी प्रकार की छेड़छाड़ किये बिना अतिरिक्‍त 10 परसेन्‍ट आरक्षण का प्रावधान शिक्षण संस्‍थान में और सेवाओं में दिया जाएगा।

चर्चा शुरू करते हुए कांग्रेस के, के. वी. थॉमस ने कहा कि उनकी पार्टी इस कोटे के खिलाफ नहीं है और इसका समर्थन करती है, लेकिन जिस ढंग से इसे लाया गया है उससे सरकार की ईमानदारी पर कई प्रश्‍न खड़े होते हैं। उन्‍होंने विधेयक को संयुक्‍त संसदीय समिति को भेजे जाने की मांग की।

चर्चा में हस्‍तक्षेप करते हुए वित्‍तमंत्री अरूण जेटली ने कहा कि यह सभी को सामान अवसर प्रदान करने का प्रयास है तथा यह सबका साथ सबका विकाससुनिश्चित करेगा।

केन्‍द्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी प्रमुख राम विलास पासवान ने कहा कि यह मांग लंबे समय से आ रही थी, जिसे एन.डी.ए. सरकार ने पूरा किया है।

तृणमूल कांग्रेस के सुदीप बंदोपाध्‍याय, शिव सेना के आनंद राव अदसूल और बीजू जनता दल के भर्तृहरि महताब ने भी विधेयक का समर्थन किया। मार्क्‍सवादी कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के जितेन्‍द्र चौधरी ने कहा कि उनकी पार्टी सैद्धांतिक रूप से विधेयक के पक्ष में है, लेकिन इसे संयुक्‍त संसदीय समिति को भेजा जाना चाहिए।