जिला कांग्रेस कार्यालय, राजीव भवन, नघेटा रोड,में स्वर्गीय इन्दिरा गांधी की पुण्यतिथि एवं सरदार पटेल की जयन्ती डॉ राजीव सिंह, जिला अध्यक्ष की अध्यक्षता में मनाई गई।इस अवसर पर विभिन्न वक्ताओं ने इन्दिरा गांधी व सरदार पटेल के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने बताया कि इन्दिरा ने 1965 में प्रधानमंत्री पद ग्रहण करने के बाद राजे रजवाड़ों को मिलने वाली प्रिवी पर्स को बन्द किया।इसके तहत राजाओं को एक मोटी रकम पेंशन के रूप में दी जाती थी।यही भारी भरकम राशि बाद में जनता पर खत्म की जाने लगी।पहले बैंकें केवल धन्ना सेठों के लिए थीं।इन्दिरा ने बैंकों का राष्ट्रीयकरण करके इन्हें आम जनता के लिए सुलभ करवाया।1974 में पोखरण में परमाणु विस्फोट करवाकर भारत को परमाणु क्लब में शामिल करवाया।1975 में सिक्किम को भारत में जोड़ कर भारत की सीमाओं का विस्तार किया।अस्सी के शुरुआती दौर में पंजाब बुरी तरह से जल रहा था।तब अमृतसर का स्वर्ण मंदिर आतंक का केंद्र बन गया था।यह इन्दिरा जी का ही लौह व्यक्तित्व था जिन्होंने मंदिर पर सेना की कार्यवाही द्वारा पंजाब को आतंकवाद से मुक्ति दिलवायी।यह कार्यवाही ही इतिहास में ऑपरेशन ब्लू स्टार के नाम से विख्यात हुई। 1982 में भारत की सुरक्षा को अक्षुण्ण रखने के लिए इंटीग्रेटेड मिसाइल सिस्टम की आधार शिला रखी। मैं गर्व के साथ कहती हूँ कि जब 1985-86 में मिसाइल पर वास्तविक कार्य शुरू हुआ तो मेरे पति उन तीन लोगों में से एक थे जिन्होंने भारत में मिसाइल युग का सूत्रपात किया। ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद पंजाबियों से उनकी जान को खतरा बढ़ गया इसके बावजूद इस लौह व्यक्तित्व की महिला ने पंजाबी सुरक्षाकर्मियों को अपनी सुरक्षा से नहीं हटाया।अन्ततः पंजाबी सुरक्षाकर्मियों द्वारा ही उनकी हत्या कर दी गई।अपनी हत्या से एक या दो दिन पूर्व उन्होंने कटक,उड़ीसा में कहा था कि उनके शरीर के खून का एक एक कतरा देश के लिए है।आज एक चौकीदार कहता है कि मेरा क्या मैं तो झोला उठाऊंगा और चल दूँगा।इसके बाबजूद अन्ध भक्त उस शेरनी की तुलना इस चौकीदार से करने की हिमाकत करते हैं।
डॉ राजीव सिंह ने उनके व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महान लोग इतिहास बनाते हैं लेकिन इन्दिरा वह विराट व्यक्तित्व थीं जिन्होंने भूगोल बनाया।उन्होंने 1971 में पाकिस्तान के दो टुकड़े करके एक नया देश बांग्लादेश बना दिया।सरदार पटेल के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए वक्ताओं ने बताया कि बारदोली सत्याग्रह से ही पटेल जी को सरदार की उपाधि मिली।565 रियासतों के एकीकरण के कारण ही उन्हें लौह पुरुष की संज्ञा दी गई।इस दौरान शशि भूषण शुक्ल शोले, शहर अध्यक्ष, पीपी वर्मा जिला चेयरमैन अनुसूचित जाति विभाग, शिव कुमार गुप्ता, अमलेंद्र सिंह, शशिबाला वर्मा, ममतापाल, सर्वेश कुशवाहा, देवदत्त कोरी आदि रहे।