सर्जक का मन-मस्तिष्क नितान्त सुकोमल होता है, यदि वह सर्जक है तो; क्योंकि उसकी दृष्टि ‘समय-सत्य’ होती है। वह देश (स्थान), काल तथा पात्र की रचना करता है, जिसमे उसकी भावना, संवेदना, कल्पना तथा विचारशीलता का सौन्दर्यबोध संलक्षित होता है।

यहाँ ‘धूप-चरित्र’ पर एक काव्यिक दृष्टि-निक्षेपण किया गया है, जिसे ‘न्यायाधीश’ और ‘भारत संवाद’ के आज (१३ अप्रैल) के अंक मे प्रस्तुत किया गया है।
मै क्रमश: सम्मान्य सम्पादक-द्वय :― अमरनाथ श्रीवास्तव जी और आशीषकुमार शर्मा जी के यशस्वी जीवन की कामना करता हूँ। प्रियवर समाचार-प्रभारी― ‘न्यायाधीश’ पुनीतकुमार श्रीवास्तव जी के समुज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूँ।
◆ एक समाचारपत्र मे इस चिह्न ― (निर्देशकचिह्न) के स्थान पर इस चिह्न ? (प्रश्नात्मक चिह्न) का प्रयोग दिख रहा है, जो कि ‘प्रौद्योगिकी-दोष’ (तकनीकी त्रुटि) है। प्राय: ऐसा एक फॉण्ट को दूसरे फॉण्ट मे परिवर्त्तित करते समय हो जाया करता है। आप ? इस चिह्न को ― इस चिह्न के रूप मे ग्रहण करें।