हिन्दी-विभाग, सी० एम० पी० डिग्री कॉलेज-कर्मशाला का प्रथम दिन
१६ सितम्बर को चौधरी महादेवप्रसाद महाविद्यालय, प्रयागराज के हिन्दी-विभाग की ओर से राजभाषा-पखवाड़े के अन्तर्गत व्याकरणवेत्ता और भाषाविज्ञानी आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने ‘हिन्दी-वर्तनी एवं प्रूफ़शोधन’ विषयक त्रिदिवसीय कर्मशाला के अन्तर्गत प्रथम दिन ‘हमारे उच्चारण और लेखन मे विरामचिह्नो की उपयोगिता और महत्ता’ को छात्र-छात्राओँ और अध्यापक-अध्यापिकाओँ को विस्तृत और विशद रूप से समझाया। उन्होँने विरामचिह्न शब्द की उत्पत्ति समझायी। अल्प-विरामचिह्न, अर्द्ध-विरामचिह्न, उपविरामचिह्न, विवरण, योजक, लाघवसूचक, हंसपद, निर्देशक, सम्बोधन, विस्मयादिक, उद्धरण इत्यादिक चिह्नो के पीछे कौन-से नियम कब, कहाँ और क्योँ लागू होते हैँ, इन्हेँ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने सोदाहरण समझाया। उन्होँने यह भी बताया कि ‘हिन्दी विभाग’, ‘संस्कृत विभाग’, ‘प्रो.’, ‘डॉ.’, ‘पं.’ के प्रयोग क्योँ अशुद्ध हैँ। उन्होँने इसका कारण उचित लाघवसूचक-चिह्न का प्रयोग न करना बताया। उन्होँने विन्दु (.) को अँगरेज़ी-प्रयोग बताया, जबकि हिन्दी मे शून्य (०)-चिह्न का प्रयोग किया जाता है। एकल और उद्धरणचिह्नो मे कौन-सा अन्तर है और उनका प्रयोग किसप्रकार से किया जाता है, इन सबको व्याकरणिक नियमो के आधार पर बताया, समझाया और छात्र-छात्राओँ को बुलाकर उनसे लिखवाया भी। उन्होँने विद्यार्थियोँ के सम्बन्धित प्रश्नो के उत्तर भी दिये।

आचार्य ने बताया कि संघ लोक सेवा आयोग, राज्य लोक सेवा आयोग, कर्मचारी चयन आयोग आदिक की ओर से आयोजित परीक्षाओँ के प्रश्नपत्रोँ मे जिस तरह से योजक, विवरण और निर्देशक-चिह्नो के प्रयोग मे घालमेल कर दिया जाता है, उससे परीक्षार्थी भ्रमित रह जाता है। इसका दुष्परिणाम होता है कि वह इन चिह्नो का यथोचित प्रयोग जान नहीँ पाता, इसलिए उसके लिए वाचन और लेखन करते समय विरामचिह्नो का बोध अत्यावश्यक है।
आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने विरामचिह्नो पर प्रकाश डालते समय सम्बन्धित शब्दोँ को संधि, समास और कारक से जोड़कर समझाया, लिखाया तथा विद्यार्थियोँ को बुलाकर उच्चारणज्ञान कराया। उन्होँने हल् चिह्न का व्यवहार कैसे किया जाता है, इसे समझाया। विद्यार्थियोँ ने तन्मयतापूर्वक कर्मशाला की उपयोगिता और महत्ता को समझा।
आरम्भ मे, समारोह-संयोजिका एवं हिन्दीविभागाध्यक्ष और राजभाषा-संयोजिका क्रमश: प्रो० सरोज सिंह और प्रो० आभा त्रिपाठी (हिन्दी-विभाग) ने भाषा-विशेषज्ञ के रूप मे आमन्त्रित आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय को अंगवस्त्र धारण कराकर अभिनन्दन किया। प्रो० सरोज सिँह ने आचार्य का परिचय प्रस्तुत करते हुए बताया कि आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय इस महाविद्यालय के पुरा छात्र रहे हैँ। उनकी महाविद्यालय की समस्त गतिविधियोँ मे सक्रियता रहती थी।
इस अवसर पर प्रो० सरोज सिंह, प्रो० आभा त्रिपाठी, प्रो० शंकरन्, प्रो० दीनानाथ, डॉ० प्रेमशंकर, डॉ० रंजीत सिंह, डॉ० जी० गणेशन, डॉ० रमाशंकर, डॉ० राजेंद्र यादव, डॉ० रामानुज, डॉ० भारती कोरी, डॉ० पूजा, डॉ० प्रियंका इत्यादि हिन्दी-विभाग के प्राध्यापक उपस्थित थे।