‘डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला’ की ओर से शोधविद्यार्थियों के पथप्रदर्शन-हेतु मास-पर्यन्त एक कर्मशाला आरम्भ करने पर विचार किया जा रहा है। उसके लिए कर्मशाला में सम्मिलित होनेवाले शोधार्थियों से एकमुश्त एक निर्धारित शुल्क लिया जायेगा। शोध-कर्मशाला के अन्तर्गत निम्नांकित विषयबिन्दु सम्मिलित रहेंगे :–
० शोध-विषय :– संस्कृत, हिन्दी, भारतीय इतिहास (प्राचीन, मध्य तथा आधुनिक), पत्रकारिता, राजनीतिविज्ञान, नृविज्ञान (मानवशास्त्र), शारीरिक शिक्षा, तर्कशास्त्र, दर्शनशास्त्र, समाजशास्त्र, शिक्षाशास्त्र, संगीत तथा कला।
१- शोधविषय के निर्धारण करने के लिए कलाकौशल का ज्ञान कराना।
२- शोध-विषय का निर्धारण करना।
३- लघु और बृहद् शोध-परियोजना के औचित्य को समझाना।
४- शोध-विषय की पूर्व-पीठिका से परिचय कराना।
५- शोध के उद्देश्य, लक्ष्य, ध्येय, अर्थ, अभिप्राय, अवधारणा तथा आशय से अवगत कराना।
६- शोधविषय की सम्पूर्ण रूपरेखा का संज्ञान कराते हुए, विषय की रूपरेखा तैयार कराना।
७- शोधविषयवस्तु का आद्यन्त संबोध कराना।
८- ‘विश्वविद्यालय अनुदान आयोग’-द्वारा संस्तुत शोधपत्रिकाओं के लिए शोधविषयक आलेखों का चयन और लेखन कराने का अभ्यास कराना।
९- तैयार किये गये शोधप्रबन्धों का परीक्षण करना तथा संशोधनार्थ उपयुक्त मार्गदर्शन करना।
१०- अन्य विषय-बिन्दुओं पर सम्यक् मार्गदर्शन।
११- प्रकीर्ण।
(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २८ नवम्बर, २०१९ ईसवी)