आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय का मार्गदर्शन

सामान्य अध्ययन’ की तैयारी करना सीखें

 इस जगत् मे दो प्रकार के ज्ञान होते हैं :-- पहला, 'सामान्य ज्ञान' और दूसरा, 'विशेष ज्ञान'। सामान्य ज्ञान का स्तर विशेष ज्ञान की तुलना मे अत्यन्त सहज रहता है और विशेष ज्ञान 'वैकल्पिक विषयों' के रूप मे होता है; क्योंकि उनका अध्ययन  'पुस्तकीय' ही होता है, जिसके लिए एक विशेष प्रकार की दक्षता की आवश्यकता पड़ती है। विश्व मे प्रतिपल शैक्षिक दृष्टिकोण से जो कुछ भी नकारात्मक अथवा सकारात्मक घटता रहता है, वह 'सामान्य ज्ञान' कहलाता है। यह सामान्य ज्ञान भी दो प्रकार का होता है :-- पारम्परिक (सदाबहार) सामान्य ज्ञान और सम-सामयिक सामान्य ज्ञान। इन दोनो ही ज्ञान का विस्तृत रूप 'सामान्य अध्ययन' कहलाता है। उदाहरण के लिए-- ऋतुएँ कितने प्रकार की होती हैं? अधोलिखित मे से सापेक्षता का सिद्धान्त कौन-सा है? भारत के राष्ट्रीय गीत के रचनाकार (यहाँ 'लेखक' अशुद्ध है।) का नाम क्या है? विषुवत् रेखा किसे कहते हैं? कथकलि किस राज्य का लोकनृत्य है? बक्सर का युद्ध किनके मध्य किया गया था? निम्नांकित मे से 'पराविद्या' का उदाहरण कौन-सा है? अधोटंकित मे से किसका नाम बदलकर 'कर्त्तव्यपथ' किया गया है? आदिक। इस तरह के वे प्रश्न, जिनमे कोई परिवर्त्तन नहीं होता, 'पारम्परिक' सामान्य अध्ययन के अन्तर्गत रेखांकित होते हैं। वे विषय, जो बदलते रहते हैं; जिनमे क्रियाएँ-प्रतिक्रियाएँ होती रहती हैं; जो नये रूप मे प्रकट होते रहते हैं; घटित होते रहते हैं, 'सम-सामयिक' सामान्य अध्ययन कहलाते हैं। उदाहरण के लिए-- अब तक ओलिम्पिक-खेलकूद-प्रतियोगिता का आयोजन कितनी बार किया जा चुका है? श्रीलंका के वर्तमान राष्ट्रपति कौन हैं? अभी तक भारतीय संविधान मे कितने संशोधन किये जा चुके हैं? विश्व कप टी-२०' प्रतियोगिता-- २०२२ का फ़ाइनल मैच किस देश के किस स्टेडियम मे खेला गया था? वर्ष २०२२ का  'सरस्वती पुरस्कार' किसे दिया गया था? भारत मे कुल विश्वविद्यालयों की संख्या कितनी है? आदिक। इन दोनो ही उदाहरणो से यह सुस्पष्ट हो जाता है कि 'परम्परागत' सामान्य अध्ययन स्थायी है और 'सम-सामयिक' सामान्य ज्ञान अस्थायी। हमारे विद्यार्थियों के लिए दोनो ही प्रकार के सामान्य अध्ययन का महत्त्व है, जिनमे से 'सम-सामयिक' सामान्य अध्ययन के लिए विशेष प्रकार का उद्यम करना पड़ता है। 'परम्परागत' सामान्य अध्ययन के लिए उन पुस्तकों को क्रय करना चाहिए, जिनमे तथ्य और भाषा-प्रयोग मे शुद्धता हो; विस्तारपूर्वक अध्ययन-सामग्री हो और वस्तुपरक (वस्तुनिष्ठ) कारणसहित प्रश्न सम्बन्धित अध्याय की अध्ययन-सामग्री के ठीक बाद हो; सन्तुलित विकल्प हो तथा भ्रमरहित उत्तर हो। वैसे तो सामान्य ज्ञान लिखनेवाले हर गली मे मिल जाते हैं; परन्तु परीक्षोपयोगी दृष्टि से शुद्धता और प्रामाणिकता के साथ लिखनेवाले गिने-चुने हैं। 'सम-सामयिक सामान्य ज्ञान' के अध्ययन के लिए हमारे विद्यार्थियों के लिए दैनिक समाचारपत्र (हिन्दी-अँगरेज़ी), रेडियो तथा टी० ह्वी०-चैनल ('टी० वी०' अशुद्ध है।) सहायक सिद्ध हो सकते हैं। इन सभी स्रोतों से प्रतिदिन प्रकाशित और प्रसारित समाचारों, समाचार-विश्लेषणो-समीक्षाओं आदिक को गम्भीरतापूर्वक पढ़ना, सुनना तथा समझना चाहिए। हमारे विद्यार्थियों को भली-भाँति जानना होगा कि जितनी भी प्रतियोगितात्मक पत्रिकाएँ प्रकाशित होती हैं, उनकी सौ प्रतिशत सम-सामयिक सामग्री उपर्युक्त माध्यम से ही तैयार करायी जाती है। 
 
आप 'गूगलजीवी' न बने। 'यू ट्यूब' मे जितने भी 'सामान्य अध्ययन', 'सामान्य ज्ञान' तथा 'सामान्य हिन्दी' की शिक्षक-शिक्षिकाएँ पढ़ाती हुई दिखती हैं, उनमे से लगभग सभी अशुद्ध उच्चारण करती हैं; अशुद्ध वर्तनी को लिखते हुए दिखती हैं। उनमे से बहुसंख्य का उद्देश्य मात्र बाज़ारू रहता है। ऐसी स्थिति मे, आप ऐसे लोग से दूर रहें। आप मानक पुस्तकों का अध्ययन करने का स्वभाव बनायें। आपके पास एक ऐसी पुस्तक हो, जिसमे सामान्य अध्ययन से सम्बन्धित सभी विषयों का तथ्यपरक समावेश हो।

सामान्य ज्ञान एक ‘साधारण-सा’ शब्द दिखता है; परन्तु वह ज्ञान का एक ऐसा विस्तार है, जो प्रतिपल की वैश्विक घटनाओं से बूँद-बूँद भरते हुए, एक ‘महासिन्धु’ के रूप में दिखता है। इसी का बृहद् रूप ‘सामान्य अध्ययन’ है, जिसमें जीवन से सम्बन्धित समस्त पक्षों का सविस्तार समावेश रहता है, जिसके अन्तर्गत दर्शन, भाषा, व्याकरण, भाषाविज्ञान, साहित्य, अध्यात्म, संस्कृति, कला, मनोविज्ञान, विज्ञान-प्रौद्योगिकी, संविधान, कृषि-पशुपालन, भूगोल, इतिहास, अर्थशास्त्र, क्रीड़ा, तर्कशक्ति-अभियोग्यता, सामान्य बुद्धि-परीक्षण आदिक विषयों का अध्ययन किया-कराया जाता है। इन सभी विषयों पर परम्परागत अध्ययन-सामग्री का विस्तार है और सम-सामयिक सामग्री का भी। इस प्रकार आप यदि गम्भीरतापूर्वक अपने सम्बन्धित विषयों का अध्ययन करेंगे तो ‘सफलता’ आपके सम्मुख ‘करबद्ध-मुद्रा’ मे ‘आदेश’ की प्रतीक्षा मे खड़ी होती लक्षित होगी, इसलिए ‘दत्त-चित्त’ (एकाग्र) रहकर अध्ययन करना आरम्भ कर दें।

विचारणीय प्रमुख बातें :–
★ परम्परागत और सम-सामयिक ज्ञान का नाम ‘सामान्य ज्ञान’ है।
★ ‘परम्परागत’ और ‘सम-सामयिक’ ज्ञान का बृहद् रूप ‘सामान्य अध्ययन’ है।
★ ‘परम्परागत’ सामान्य अध्ययन के लिए स्तरीय पुस्तकों का अध्ययन करना चाहिए।
★ ‘सम-सामयिक’ सामान्य अध्ययन को सुदृढ़ करने के लिए दैनिक समाचारपत्र-पत्रिकाओं, रेडियो, टी० ह्वी० आदिक विश्वसनीय स्रोतों से जुड़ना चाहिए।

★ सामान्य अध्ययन एक ‘महासागर-सदृश’ (‘सदृश्य’ अशुद्ध है।) है, जिसके अध्ययन के लिए एकाग्र रहें।

सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; ३० अक्तूबर, २०२२ ईसवी।)