हरदोई/बिलग्राम- ‘हाथी मेरे साथी’ हिन्दी फिल्म का एक गाना है ‘ चल यार धक्का मार, बंद है मोटरकार’. यह गाना इन दिनों हरदोई में सटीक बैठ रहा है़ जहां एंबुलेंस को स्टार्ट करने के लिए धक्का लगाना पड़ता है़। किस्मत ने साथ दे दिया तो वाहन स्टार्ट हो जाता है, वर्ना रेफर मरीजों को इलाज के लिए निजी एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ता है़। यह तस्वीरें बताती है कि इन एम्बुलेंसों के रखरखाव की व्यवस्था कितनी सफल है।
प्रदेश सरकार द्वारा मरीजों को तत्काल सेवा सहायता देने के लिए एम्बुलेंस की योजना की शुरुवात की गई थी ताकि कोई भी घायल बीमार इलाज और एम्बुलेंस के अभाव मे दम न तोडे मगर सरकारी एंबुलेस की हालत बेहद नाजुक हो चुकी है। जैसे तैसे एंबुलेस को जबरदस्ती चलाया जा रहा है।हरदोई जिले में धक्के के सहारे की एम्बुलेंस तस्वीरें अक्सर दिख जाती है। जो यह दिखातीं हैं कि जिम्मेदार कितने इन सुविधाओं के रख रखाव के लिए सजग है।
बघौली, कछौना और बिलग्राम में ऐसा ही देखने को मिलता है । जब एम्बुलेंसों में धक्का लगेगा तो मरीजों का इलाज कहां से होगा यह बताने को काफी है। एम्बुलेंसों के रखरखाव व मानीटरिंग के लिए शासन की तरफ से व्यवस्थाएं है लेकिन उन व्यवस्थाओ का हाल बुरा है और जिम्मेदार मूकदर्शक।हालांकि जब इस मामले में सीएमओ डॉक्टर एसके रावत से वार्ता की गई तो उन्होंने बताया कि एम्बुलेंसें और उनका रखरखाव आदि उनके दायरे से बाहर है लेकिन वह इस बात को जिम्मेदारों तक पहुंचाएंगे और पहुंचाते हैं।