रामू बाजपेयी पाली
___________________________________________आजकल बढ़ते कल कारखानों ने जहां मनुष्य का जीवन संकट में डाल दिया है तो ऐसे में जीव जन्तुओं का क्या होगा ? ये सोचना ही काफी भयभीत कर देता है।
गर्रा नदी शाहजहांपुर से निकलते हुए शाहाबाद आने के बाद हरपालपुर की ओर जाती है। गुरुवार को कुछ मछुआरे पाली के निकट गर्रा नदी में मछली पकड़ रहे थे।
अचानक ही बड़ी संख्या में मृत मछलियां और कछुए नदी की धार में दिखाई दिए। इस पर इन लोगों ने ग्रामीणों को सूचना दी।
मछुआरों की मानें तो शाहजहांपुर में स्थित विभिन्न फैक्ट्रियों से छोड़ा जाने वाला गंदा पानी गर्रा नदी के पानी को विषैला कर रहा है। इसी के कारण जलीय जीव-जंतु मर रहे हैं।
जानकरी के मुताबिक ठेकेदार कल्लू व श्री पाल कश्यप जब तक पहुंचे तब तक घटना घट चुकी थी ।
लगभग साढ़े तीन कुंतल मरी हुई मछलियां नदी से निकाली गई हैं। इसके अलावा कुछ कछुए भी मरे हुए निकले।
पाली कस्बे के पशु चिकित्साधिकारी डॉक्टर धर्मेन्द्र कुमार ने बताया कि विषाक्त पानी पीने से अन्य पशु-पक्षियों का जीवन भी खतरे में पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि जब तक पानी फ्लशआउट न हो जाए तब तक पशु पालकों को ध्यान देना चाहिए कि उनके पशु नदी का पानी न पिएं।
पाली सीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉक्टर आनंद शुक्ला ने बताया कि संभवत: फैक्ट्रियों की सफाई में तेज एसिड का इस्तेमाल किया हुआ पानी नदी में छोड़ दिया गया। इससे ही पानी विषाक्त हो गया, जो जीव जन्तुओं के लिए जानलेवा साबित हुआ।
ये कोई पहली घटना नही है जब मछलियों की जान गई है इससे लगभग एक माह पूर्व ऐसी ही घटना घटी थी जिसमे लगभग दस क्विंटल मछलियों की जान गई थी ।