अकेले शुभमन गिल ने न्यूज़ीलैण्ड के दल को पराजित कर, शृंखला भारत के नाम की

● समीक्षक― आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

१ फ़रवरी को भारतीय दल और न्यूज़ीलैण्ड-दल के विरुद्ध गुजरात के नरेन्द्र मोदी स्टेडियम मे तीन मैचों की शृंखला के तीसरे और अन्तिम टी-२० मैच मे भारतीय कप्तान हार्दिक पण्ड्या ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी करने का निर्णय किया था और बल्लेबाज़ों ने २० ओवरों मे ४ विकेटों पर २३४ रन बनाये थे।

इससे पूर्व अभी हाल ही मे प्रथम ‘अण्डर–१९’ महिला-क्रिकेट-विश्वकप’ मे इंग्लैण्ड-दल को ७ विकेटों से पराजित कर, चैम्पियनशिप जीतनेवाली भारतीय क्रिकेट-दल की खिलाड़ियों (किशोरियों और युवतियों) को मास्टर-ब्लास्टर सचिन तेन्दुलकर की उपस्थिति मे उनके कप्तान शेफाली वर्मा को पूरे दल के लिए पूर्व-घोषित पाँच करोड़ रुपये का पुरस्कार प्रदान कर, हमारी होनहार खिलाड़ियों का उत्साह और मानवर्द्धन किया गया।

आरम्भिक बल्लेबाज़ी ईशान किशन की लगातार दिशाहीन और तकनीकरहित बल्लेबाज़ी करने के कारण असरहीन साबित हुई थी, यद्यपि राहुल त्रिपाठी ने २२ गेंदों मे ४४ रन बनाकर आनेवाले बल्लेबाज़ों के लिए मार्ग प्रशस्त कर दिया था। शुभमन गिल और हार्दिक पण्ड्या के बीच आक्रामक भागीदारी भारतीय रन-औसत को दहाई मे बनाये रखा था। जहाँ तक न्यूज़ीलैण्ड की गेंदबाज़ी और क्षेत्ररक्षण का प्रश्न है, बेअसर रहे; जिस क्षेत्ररक्षण के लिए न्यूज़ीलैण्ड के खिलाड़ी प्रसिद्ध रहे हैं, उसकी छाया भी नहीं दिखी थी; कई कैच छोड़े गये थे। यदि वे सभी कैच लिये गये रहते तो परिणाम और प्रभाव मे परिवर्त्तन दिख सकता था; खेल मे रोमांच दिखता। शुभमन गिल के दो आसान कैच छोड़ा जाना, न्यूज़ीलैण्ड-दल के लिए घातक रहा। यही कारण था कि भारतीय दल ने ४ विकेट पर २३४ रन बनाये थे।

‘प्लेयर ऑव द मैच’ शुभमन गिल ने मात्र ६३ गेंदों मे अविजित १२६ रन बनाये थे, जिनमे १२ चौके और ७ छक्के शामिल थे।

न्यूज़ीलैण्ड के कप्तान सेण्टनर ने अपने ७ गेंदबाज़ों से गेंदें फेंकवायी थी; परन्तु मिचेल के अलावा कोई भी गेंदबाज़ प्रभावक नहीं दिखा था। यहाँ कप्तान सेण्टनर से ग़लती यह हुई थी कि उन्होंने बहुत ही देर मे मिचेल को गेंदबाज़ी करने के लिए बुलाया था; वही यदि आरम्भ मे मिचेल को गेंदबाज़ी दी गयी रहती और उनसे उनके सभी ‘स्पेल’ (चार ओवर) फेंकवाये गये रहते तो भारतीय बल्लेबाज़ों पर निश्चित रूप से दबाव पड़ता।

२३५ रनो के लक्ष्य का पीछा करते हुए, न्यूज़ीलैण्ड का आरम्भिक प्रदर्शन बेहतर नहीं रहा; क्योंकि आरम्भिक गेंदबाज़ी कर रहे, हरफ़नमौला/समग्र प्रदर्शक (आलराउण्डर) कप्तान हार्दिक पण्ड्या की गेंद पर ‘स्लिप’ के क्षेत्र मे खड़े हुए, सूर्यकुमार यादव ने जिस कलात्मक ढंग से विस्मित करनेवाला कैच लपका था, वह दर्शनीय रहा। दूसरा ओवर विवादास्पद (टी-२० शृंखला के इतिहास मे सर्वाधिक ‘नो बॉल’ फेंकनेवाले) गेंदबाज़ अर्शदीप सिंह का रहा, जिन्होंने अपने पहले ही ओवर मे २ विकेट लेकर न्यूज़ीलैण्ड के बल्लेबाज़ों को हतप्रभ (हैरान) कर दिया था। उस समय तक न्यूज़ीलैण्ड का स्कोर २ ओवरों मे ३ विकेटों पर मात्र ५ रन का था। चौथा विकेट हार्दिक पण्ड्या ने लिया था और उनकी पहले ओवर की गेंदबाज़ी पर, जिस स्थान पर खड़े सूर्यकुमार यादव ने जिस कलात्मकता के साथ अविश्वसनीय कैच को विश्वसनीय बनाकर दिखा दिया था, उसी तरह से उनके दूसरे ओवर मे भी सूर्यकुमार ने कैच लिया था, जो कि क़ाबिले तारीफ़ रहा।

पाँचवें ओवर के लिए बहुत महँगे सिद्ध होनेवाले तीव्रतम गेंदबाज़ उमरान मलिक को गेंदबाज़ी का मौक़ा दिया गया था, जिन्होंने तीसरे ही गेंद पर रफ़्तार से ‘बीट’ करते हुए, न्यूज़ीलैण्ड के बल्लेबाज़ के विकेट की गिल्लियाँ बिखेर दी थीं, तब ५ ओवर मे मात्र २२ रन बने थे; ज़रूरी रन-दर १४.२० प्रति ओवर तक पहुँच चुका था। न्यूज़ीलैण्ड ने ‘पॉवर प्ले’ (छठा ओवर) मे ५ विकेटों पर ३० रन बनाये थे, जबकि भारत का १ विकेट पर ५८ रन थे।

छठे विकेट के लिए मिचेल और सेण्टनर संघर्ष करते हुए दिख रहे थे; मगर भारतीय गेंदबाज़ बेहद कंजूस दिख रहे थे; उस पर वह क्षेत्ररक्षक, सूर्यकुमार यादव, जिसने लगातार स्लिप-क्षेत्र मे दो अविश्वसनीय कैच लिये थे, अपना तीसरे कैच लेकर छठे विकेट का भी पतन करा दिया था, तब शिवम मावी की गेंदबाज़ी थी। अपने उसी ओवर के पाँचवें गेंद मे शिवम मावी ने ‘प्वाइण्ट’ पर खड़े राहुल त्रिपाठी के हाथों कैच कराकर सातवाँ विकेट भी लिया था। उसके बाद हार्दिक पण्ड्या ने लॉकी फ़र्ग्युसन को नौवें ओवर के तीसरे गेंद पर आउट कर, न्यूज़ीलैण्ड का आठवाँ विकेट गिरा दिया था।

१० ओवर मे न्यूज़ीलैण्ड का स्कोर ८ विकेट पर ५६ था। उनका रन-दर ५.६० था, जबकि जीत के लिए १८.२० प्रति ओवर के हिसाब से रन बनाने की ज़रूरत थी। एक ही खिलाड़ी मिचेल के रूप मे दिख रहा था, जो लगातार संघर्ष कर रहा था। दूसरी ओर, लग चुका था कि अकेले शुभमन गिल ही न्यूज़ीलैण्ड-दल को पराजित कर दिखायेंगे। ११.५ ओवर मे हार्दिक ने अपना चौथा विकेट ले लिया था। अन्तिम ओवर तक जूझ रहे मिशेल को भी पैवेलियन भेज दिया गया था। अन्तिम विकेट गिरते समय न्यूज़ीलैण्ड-दल का कुल स्कोर १२.१ ओवर मे, यानी ७३ गेंदों मे ६६ रन का था।

इस प्रकार भारतीय दल ने ‘तृतीय मास्टरकार्ड मैच मे न्यूज़ीलैण्ड के दल को १६८ रनो से पराजित कर, ‘टी-२०’ शृंखला २-१ से जीत ली है। हार्दिक पण्ड्या ने मात्र १६ रन देकर सर्वाधिक ४ विकेट लिये थे। हार्दिक पटेल के समग्र प्रदर्शन के लिए ‘मैन ऑव़ द सीरीज़’ का पुरस्कार दिया गया था। भारतीय दल ने इस निर्णायक मैच को एकपक्षीय बनाते हुए, ‘मास्टरकार्ड चैम्पियनशिप’ अपने अधिकार मे कर ली है।

अब भारतीय दल के खिलाड़ियों के वास्तविक प्रदर्शन का परीक्षण ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के साथ ९ फ़रवरी से होनेवाली चार टेस्ट मैचों की शृंखला मे होगा।

इस शृंखला मे भारतीय निर्णायकगण (अम्पायर्स) जे० आर० मदन, अनिल चौधरी, नितिन मेनन, पद्मनाभन् के सभी निर्णय अविवादित रहे। प्रशिक्षक राहुल द्रविड़ की प्रशिक्षण-पद्धति सराहनीय रही।

(सर्वाधिकार सुरक्षित― आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १ फ़रवरी, २०२३ ईसवी।)
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