डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय-
आश्चर्य हुआ था, जब पाँच टी-20 मैचों में से एक मैच न्यूज़ीलैण्ड हार चुका था और ऑकलैण्ड के मैदान में खेले गये दूसरे मैच में टॉस जीतकर भी उसने पहले बल्लेबाज़ी करने का निर्णय किया था। उसे क्षेत्ररक्षणकर भारत के कुल रन का पीछा करना चाहिए था। भारतीय गेंदबाज़ों ने पिच का स्वभाव पढ़ लिया था और उसी के अनुकूल गेंदबाज़ी भी की थी। यही कारण था कि न्यूज़ीलैण्ड के बल्लेबाज़ २० ओवरों में ५ विकेटों पर केवल १३२ बना सके थे। गेंद बल्ले पर थोड़ी रुककर आ रही थी।
भारत के लिए भी बल्लेबाज़ी बहुत आसान नहीं थी। रोहित शर्मा (८ रन) और विराट कोहली (११ रन) के विकेट जल्दी ही गिर गये थे, जबकि इस मैच में भी के०एल० राहुल (अविजित ५७ रन) और श्रेयस अय्यर (४४ रन) ने धैर्य के साथ खेलना आरम्भ किया था और जीत की नीवँ डाल दी थी। इस बीच, न्यूज़ीलैण्ड को दो ऐसे आसान अवसर मिले थे, जिसमें दोनों को ही रन-आऊट किया जा सकता था, जिन्हें न्यूज़ीलैण्ड खो चुका था। चौदहवें ओवर से भारत ने अपना ‘गेयर’ बदला था और चौक्कों-छक्कों से भारत ने अपनी जीत सुनिश्चित कर दी थी। इससे यह सिद्ध हो चुका है कि भारतीय दल रोहित शर्मा और कोहली के आऊट होने पर भी अपनी सुदृढ़ता बनाने में समर्थ है।
अन्तत:, भारत ने १७.३ ओवरों में ३ विकेट पर १३५ रन बनाकर दूसरा टी-20 मैच ७ विकेटों से जीतकर सीरीज़ पर २-० से अग्रता ले ली है और लगभग सीरीज़ को अपने नियन्त्रण में कर लिया हैं; क्योंकि अभी तीन मैच और होने हैं, जिनमें से एक भी मैच जीतते ही भारत सीरीज़ पर अधिकार कर लेगा। दूसरे मैच का भी ‘मैन ऑव़् दी मैच एवार्ड’ भारत के ही बल्लेबाज़-विकेटरक्षक के०एल०राहुल को दिया गया।
तीसरा मैच २९ जनवरी को ‘हैमिल्टन’ न्यूज़ीलैण्ड के मैदान में होगा।
(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २६ जनवरी, २०२० ईसवी)