उद्योग जगत और उनके संघों का विचार है कि मेक इन इंडिया पहल की शुरूआत के बाद भारत की अर्थव्यवस्था विकसित हो रही है और यह वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में उभर रहा है। मेक इन इंडिया इसलिए महत्वपूर्ण है कि यह भूमि अधिग्रहण, अनिश्चित कर प्रणाली, कमजोर बुनियादी सुविधाएं, बिजली की आपूर्ति में अनिश्चितता तथा नौकरशाहों की लाल फीताशाही जैसी समस्याओं के समाधान के लिए अवसर प्रदान करता है। फिक्की के राजस्थान राज्य परिषद के अध्यक्ष अतुल शर्मा का मत है कि सरकार उद्योगों के लिए जरूरी सभी छोटी-बडी जरूरतों पर काम करके माहौल तैयार कर रही है।
मेक इन इंडिया का जो इनिसियेटिव लोंच हुआ था 2014 में ये बेसिकली एक कैम्पेन है मेन्युफेक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए। अब इसके बहुत सारे सस्पेक्ट्स हैं। इज़ ऑफ डूइंग बिजनेस है, इन्फ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट है, स्कील डवलेपमेंट है, फाइनेंसली इनक्लूजन है और गर्वनमेंट की मल्टीप्रॉम एप्रोच चल रही है और सभी दिशा में काम हो रहा है। ट्रांसफार्मर निर्माता कंपनी के मालिक एस एल गोलेछा का मानना है कि सरकार गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रही है। अगर हम मेक इन इंडिया की बात कर रहे हैं तो उसके अंदर हम क्वालिटी कांउसियस हो जाएंगे तो डेफिनेटली इंटरनेशनल स्टेडर्ड के ऊपर ले जा पायेंगे हम अपने प्रोडक्ट को। सरकार द्वारा उठाये गए विभिन्न कदमों से माना जा रहा है कि मेक इन इंडिया भारतीय अर्थव्यवस्था को बढावा देने में प्रमुख भूमिका निभाएगा।