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भारत-ब्रिटेन ने नए आव्रजन एवं आवाजाही साझेदारी समझौते पर किए हस्ताक्षर

18 से 30 वर्ष की आयु के 3,000 युवाओं को एक दूसरे के देश में काम करने की मिलेगी सुविधा

5 मई, नई दिल्ली। भारत और ब्रिटेन ने मंगलवार को एक नए आव्रजन एवं आवाजाही साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर किए। भारतीय विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के निकलने के बाद यह समझौता दोनों देशों के बीच मौजूदा आर्थिक, सांस्कृतिक एवं सम्बन्धों को और मजबूत करेगा।

नए समझौते से दोनों देशों के 18 से 30 वर्ष की आयु के 3,000 युवाओं को पेशेवर एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत एक दूसरे के देश में काम करने और रहने के लिए सुविधा मिलेगी। इससे उन भारतीय नागरिकों की वापसी की प्रक्रिया में तेजी आएगी जिनका ब्रिटेन में रहने का कोई वैध अधिकार नहीं है। इसी तरह ब्रिटिश नागरिकों की वापसी की प्रक्रिया भी सुगम होगी। इसके साथ ही इससे संगठित आव्रजन अपराध को लेकर अधिक सहयोग सुनिश्चित होगा।

विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (पश्चिमी यूरोप) संदीप चक्रवर्ती ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि “यह हमारा कर्तव्य है कि जो भारतीय नागरिक विदेश में बिना दस्तावेज के हैं और उनको राष्ट्रीयता या निवास परमिट नहीं दिया जा रहा है उन्हें वापस लाना होगा।”

वहीं ब्रिटेन के आंतरिक मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि यह समझौता “अच्छे, प्रतिभाशाली और कानूनी तरीके से यूके में आने वाले लोगों को सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से किया गया है।” मंत्रालय ने आगे कहा कि “समझौता यह भी सुनिश्चित करेगा कि ब्रिटिश सरकार उन लोगों को अधिक आसानी से वापस भेज सकता है जिनके पास ब्रिटेन में रहने का कोई अधिकार नहीं है और इससे उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकेगी जो हमारी व्यवस्था का दुरुपयोग करते हैं।”

मोदी ने जॉनसन से फोन पर बात की
चक्रवर्ती ने बताया कि इससे पहले मंगलवार को ही प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ब्रिटिश समकक्ष बोरिस जॉनसन से फोन पर बात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने आर्थिक अपराधियों के प्रत्यर्पण के विषय पर चर्चा की, जिसमें प्रधानमंत्री (मोदी) ने कहा कि “अपराधियों को सुनवाई के लिये जल्द ही वापस देश भेजा जाना चाहिए ।’’ उन्होंने कहा कि ‘‘ प्रधानमंत्री जॉनसन ने कहा कि ब्रिटेन की आपराध न्याय प्रणाली की प्रकृति के कारण उन्हें कुछ कानूनी बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन वे इससे अवगत हैं तथा वे इस इस बात का हर संभव प्रयास करेंगे कि इन लोगों को जल्द प्रत्यर्पित किया जाए ।’’

1 बिलियन पाउंड निवेश की हुई घोषणा
आव्रजन समझौते से पहले दोनों देशों द्वारा निजी क्षेत्र के निवेश के लिए 1 बिलियन पाउंड (1.39 बिलियन डॉलर) की घोषणा की। पूर्ण व्यापार समझौता पर बातचीत शरद ऋतु में शुरू होने वाली है।

ब्रिटेन के आंकड़े पर भारत ने उठाया सवाल
ब्रिटेन का कहना है कि देश में लगभग 100,000 भारतीय अवैध रूप से रह रहे हैं। भारत ने पूर्व में इस संख्या की सत्यता पर सवाल उठाया है क्योंकि माना जाता है कि इस आंकड़े में भारतीय उपमहाद्वीप के अन्य हिस्सों से भी नागरिक शामिल हैं।

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