जय श्री राम! अन्ततः शुभ वेला आ गयी

आदित्य त्रिपाठी ‘यादवेन्द्र’ (प्रबन्ध सम्पादक) :

जब मन आह्लादित होता है तो मुंह से शब्द नहीं निकलते; शरीर शिथिल हो जाता है । जिस स्वप्न को लेकर बड़ा हुआ आज उसके वास्तविकता के धरातल पर उतरने पर मौन हूँ…….अभिभूत हूँ….अप्रतिम आनन्द की अनुभूति हो रही है । जय-जय सियाराम…