बोलो जय श्री राम
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–राम-नाम तो आड़ है, काम दिखे बेकाम।बेच रहे हैं देश को, बोलो जय श्री राम।।दो–दिखता नक़्ली काम है, और न अस्ली चाम।ठगते आये देश को, बोलो जय श्री राम।।तीन–मूल विषय […]
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–राम-नाम तो आड़ है, काम दिखे बेकाम।बेच रहे हैं देश को, बोलो जय श्री राम।।दो–दिखता नक़्ली काम है, और न अस्ली चाम।ठगते आये देश को, बोलो जय श्री राम।।तीन–मूल विषय […]
एक–‘राम’-भाव से शून्य हैं, ‘श्री’ से भी हैं हीन।भाड़े के ‘जय’ दिख रहे, मानो कोई दीन।।दो–देश तोड़ना रह गया, जिनके जिम्मा काम।हृदय हलाहल है भरा, बोलें जय श्री राम।।तीन–नारी! तू नारायणी, कवि कहता चहुँ ओर।अबला-सबला […]
आदित्य त्रिपाठी ‘यादवेन्द्र’ (प्रबन्ध सम्पादक) : जब मन आह्लादित होता है तो मुंह से शब्द नहीं निकलते; शरीर शिथिल हो जाता है । जिस स्वप्न को लेकर बड़ा हुआ आज उसके वास्तविकता के धरातल पर […]