कारागार विभाग मुख्यालय में अपने कर्तव्यों व दायित्वों का निर्वाहन करते हुए जांबाज शहीद अधिकारियों और कर्मचारियों की शहादत को स्मरण किया। डीजी जेल आनंद कुमार ने 15 फिट लंबी स्मृतिका पट्टी पर पुष्प चक्र चढ़ा कर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित कर विभाग को समर्पित किया ।
कारागार मुख्यालय के प्रांगण में स्थित काले ग्रेनाइट की पट्टिका के ऊपर के भाग पर अशोक की लाट है तथा पार्श्व भाग पर उन 17 जाबाज़ जवानों के साथ जेल अधीक्षक आर के तिवारी का भी नाम भी अंकित हैं जिन्होने शहादत देकर विभाग का मान सम्मान बढ़ाया था।
इस मौके पर कारागार विभाग की पुनर्वास एवं कल्याण समितियों के माध्यम से जेलों की फैक्ट्रियों में उत्पादित बन्दी निर्मित लोकोपयोगी सामग्रियों के प्रदर्शन एवं बिक्री केंद्र का भी शुभारंभ किया जिसमें विभिन्न जेलों में बन्दियों द्वारा उत्पादित घरेलू उपयोग की वस्तुएं आम जन के दर्शनार्थ एवम बिक्री हेतु उपलब्ध है। विभिन्न उपयोग की वस्तुएँ केंद्रीय कारागार वाराणसी, प्रयागराज, आगरा, बरेली जिला जेल, उन्नाव मॉडल जेल, लखनऊ जिला जेल, मथुरा जिला जेल, गाजियाबाद आदि जिलों में उपस्थित हैं जिनमें मशरूम सब्जी मसाला, मशरूम अचार, मशरूम से निर्मित नमकीन, चना जोर गरम, लेडीस पर्स, पैंट शर्ट, रेडीमेड कुर्ता-पायजामा, रजाई, तकिए के कवर, चौधरी तुलसी ग्रीन टी, तुलसी लेमन टी, तुलसी जिंजर टी, मिट्टी की मूर्तियां, मिट्टी के सादे और डेकोरेटेड दीये, विभिन्न प्रकार की मोमबत्तियाँ, लकड़ी के विभिन्न प्रकार के फर्नीचर, रॉकिंग चेयर, काउच, मंदिर, लैपटॉप टेबल, बुक्शेल्फ, हवन कुंड, शिवलिंग, विभिन्न प्रकार के वुडेन किचनवेयर और बन्द, ब्रेड, रस्क, बिस्कुट आदि बेकरी प्रोडक्ट उपलब्ध हैं। इस अवसर पर डीजी जेल ने नारियल फोड़कर और फीता काटकर इस मंत्रोच्चार के बीच इस केंद्र का शुभारंभ किया और इस दीपावली पर पूजन हेतु बन्दियों द्वारा उत्पादित गणेश लक्ष्मी की मूर्ति, दीये मोमबत्तियां और बेकरी प्रोडक्ट खरीदे। कारागार के अन्य अधिकारियों कर्मचारियों ने भी इस केंद्र से ज़रूरी वस्तुएं खरीदीं।
डीजी जेल आनन्द कुमार द्वारा इस अवसर पर यह आशा व्यक्त की गई कि कारागार की सभी जेलों में बंदियों के पुनर्वास हेतु चल रहे उद्योगों से संबंधित उत्पादित वस्तुएं यहां विक्रय एवं दर्शनार्थ रखी जाएंगी। जिससे जनसामान्य द्वारा खरीद कर बंदियों के सुधार कार्यक्रम को प्रोत्साहित किया जाएगा।
वहीं बन्दियों को उत्पादित वस्तुओं के रूप में श्रम मूल्य मिलेगा जिससे वे अपने परिवार का पालन पोषण कर सकेंगे और उन्हें रिहाई के पश्चात समाज में एक बेहतर नागरिक के रूप में स्वीकार किया जा सकेगा।