कर्नाटक के मतदातागण! ‘काँग्रेस’ और ‘भा०ज०पा०’ का विकल्प तलाशिए

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
(प्रख्यात भाषाविद्-समीक्षक)

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय


काँग्रेस ने अपनी शासनावधि में अपने घोषणापत्र के अन्तर्गत किये गये वायदे यदि पूरे न किये हों तो उसे जड़सहित उखाड़ फेंकिए और ‘भारतीय जनता पार्टी’ को वहाँ पाँव पसारने का मौक़ा तक नहीं दीजिए; क्योंकि जहाँ-जहाँ उसकी और गठबन्धन में सरकारें हैं, पूर्णत: असफल दिख रही हैं।अब तीसरे विकल्प को अवसर दीजिए; क्योंकि ‘भारतीय जनता पार्टी’ अब तक की सर्वाधिक अविश्वसनीय और ख़ुदगर्ज़ पार्टी है। केन्द्र और राज्यों में जिस तरह से ‘हिन्दू’ और ‘दलित’ नामक घिनौने ‘आऊटडोर’ खेल खेले जा रहे हैं, उनके परिणाम भारत राष्ट्र को दुर्बल बनाने के लिए चिर-प्रतीक्षित हैं।
काँग्रेस और भारतीय जनता पार्टी में ऐसे अनेक जाहिल प्रवक्ता हैं, जो अनर्गल प्रलाप करते रहते हैं। वे दोनों देश के मतदाताओं को मूर्ख बना रहे हैं। देश के किसान अभावों में जी रहे हैं; शिक्षित युवावर्ग अपनी पहचान पाने के लिए एड़ियाँ घिस रहा है; अपने अधिकार के लिए भूखे-प्यासे रहकर आन्दोलन कर रहा है; परन्तु निर्दय सरकारें अपनी जिह्वा सिल रखी हैं। तो क्या नौकरियाँ अलादीन के चराग़ का स्पर्श कराकर उपजायी जायेंगी? नमो-नमो का मन्त्र जापकर नौकरियों के पेड़ उगाये जायेंगे? उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, महाराष्ट्र, गुजरात, बिहार आदिक राज्यों में वहाँ के शिक्षित बेरोज़गारों, विशेषत: न्यायालयों-द्वारा आदेशित करने के बाद अर्हता-प्राप्त अर्हताओं को अभी तक नौकरियाँ नहीं दी गयी हैं।
जो राजनीतिक पार्टी यह सन्देश प्रेषित करे कि पकौड़े की दूकान खोलिए; गाय पालिए; चाय बेचिए, उस पार्टी के प्रमुख लोग का मानसिक धरातल कितना गिरा हुआ है, इसे सहजता से ही समझा जा सकता है।
मतदाताओं के पास बुद्धि है; विवेक है, उनका भरपूर आश्रय लीजिए और जो जनता की भावनाओं के साथ धर्म, जाति, वर्गादिक की आड़ में बीभत्स खेल खेल रहे हैं, उन्हें सत्ता के पास आने का बिलकुल मौक़ा मत दीजिए; अन्यथा पछताना पड़ेगा; क्योंकि वे आपके सपनों के सौदागर हैं।

(सर्वाधिकार सुरक्षित)