सुशान्त-आत्महत्या के साक्ष्य बहुत-कुछ इशारा करते

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

‘मुक्त मीडिया’ का ‘आज’ का सम्पादकीय

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

सुशान्त-आत्महत्या-प्रकरण में सी०बी०आइ० की ओर से जाँच-विलम्ब का कारण क्या है? ऐसी स्थिति में, साक्ष्य समाप्त किये जा सकते हैं; साक्षियों की हत्या भी हो सकती है। इस काण्ड में उद्धव ठाकरे के पुत्र आदित्य ठाकरे का भी नाम दबे स्वर में लिया जा रहा है। इस दृष्टि से यह प्रकरण अतीव महत्त्व का हो गया है। इस प्रकरण में जितने भी तथ्य सार्वजनिक हो रहे हैं, उसके आधार पर सुशान्त की आत्महत्या का विषय ‘हत्या’ के रूप में दिख रहा है।

सबसे बड़ी बात, जिसका मैंने अध्ययन किया है, वह यह है कि सुशान्त एक अति महत्त्वाकांक्षी और मुक्त मन-मस्तिष्क के कलाधर्मी थे। वे अत्यन्त संवेदनशील और सहज व्यक्ति थे। सुशान्त के मन-मस्तिष्क में जिजीविषा और जिगीषा के भाव कूट-कूट कर भरे थे। कथित आरोपित रिया चक्रबर्ती ने सुशान्त का भावनात्मक और दैहिक शोषण कर, उन्हें अपने वशीभूत कर लिया था। ऐसा इसलिए कि रिया भी अति महत्त्वाकांक्षी है; परन्तु बेहद लोभी है। यही कारण है कि कालान्तर में, अपने माँ पिता तथा भाई के संकेत पर रिया की दृष्टि सुशान्त के आर्थिक साम्राज्य पर स्थिर हो गयी और वह उस साम्राज्य की एकमात्र साम्राज्ञी बनने का स्वप्न देखने लगी थी। धीरे-धीरे, उसने सुशान्त के साथ छल-छद्म का सम्बन्ध बनाया और उनकी अचल-चल सम्पदा पर अपना अधिकार स्थापित करने लगी। इसके लिए रिया ने सर्वप्रथम सुशान्त के परिवार से, विशेषत: बहनों से सम्पर्क समाप्त कराया, फिर पिता से। इतना ही नहीं, वह सुशान्त का मनोरोगी सिद्ध करना चाहती थी, जिससे कि सुशान्त के आर्थिक साम्राज्य का सूत्रधार वही दिखती रहे। यही कारण है कि किसके फ़ोन को महत्त्व देना है और किसके नहीं देना है, इसका निर्धारण रिया ही करती थी। अपने इस घिनौने कृत्य में वह पतित फ़िल्म- निर्माता-निर्देशक महेश भट्ट के साथ विशेष रूप से परामर्श करती थी। रिया के सारे कृत्य एक ‘कुलटा औरत’ के दिख रहे हैं।

इस सुशान्त-प्रकरण में फ़िल्म-उद्योग के अनेक बड़े चेहरे सामने आ रहे हैं। रिया, उसके भाई तथा पिता ‘आर्थिक घोटाले’ में बुरी तरह से फँस चुके हैं। यदि सभी परीक्षण पारदर्शिता के साथ किये गये तो यह निश्चित है कि उसके मुश्किलात बढ़ते ही जायेंगे।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १७ अगस्त, २०२० ईसवी।)