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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के ‘चिकित्सक कुलपति’ जागरूकता का परिचय दें

★आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
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कोरोना-प्रकोप के चलते, देश के शिक्षाक्षेत्र में कोविड-संक्रमण भयावह रूप में व्याप्त हो चुका है। इसका सर्वाधिक प्रभाव अलीगढ़ मुस्लिम केन्द्रीय विश्वविद्यालय में देखा जा सकता है। वहाँ के लगभग ५० वर्तमान-निवर्तमान शिक्षक और शिक्षणेतर कर्मचारियों की कोरोना से मृत्यु हो चुकी है; और वह भी मात्र २५ दिनों के भीतर।

प्रश्न है, उक्त विश्वविद्यालय में अलग से चिकित्सीय व्यवस्था है और वहाँ के कुलपति एक चिकित्सक भी हैं। इसके बाद भी उन्होंने अभी तक अपनी चिकित्सीय अभियोग्यता का परिचय क्यों नहीं दिया है? कम-से-कम एक केन्द्रीय विश्वविद्यालय होते हुए भी अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय-तन्त्र अपने संसाधनों को विकसित करते हुए, सेवारत-सेवानिवृत्त विश्वविद्यालयीय (‘विश्वविद्यालयी’ अशुद्ध शब्द है।) शिक्षक-शिक्षिकाओं और शिक्षणेतर (‘शिक्षणेत्तर’ अशुद्ध शब्द है।) कर्मचारियों की समुचित परिचर्या तो कर ही सकता था?

जिस भी शैक्षणिक/शैक्षिक/शिक्षा-संस्थान में यदि स्वयं की स्वतन्त्र चिकित्सीय इकाई (मेडिकल युनिट) है तो वर्तमान समय की माँग है, वहाँ का सम्बद्ध प्रबन्धतन्त्र कम-से-कम अपने ही कर्मचारियों के लिए समुचित व्यवस्था कर, कोरोना-उपचार के लिए ‘व्यावहारिक क़दम’ उठाये।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १० मई, २०२१ ईसवी।)

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