कछौना (हरदोई) : परिषदीय स्कूलों में कार्यरत रसोइयों को विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के चलते 8 माह से मानदेय नहीं मिला है। उनके घरों के चूल्हे कैसे जलेंगे यह कोई ध्यान नहीं दे रहा है। मानदेय न मिलने के कारण उनके सामने परिवार के भरण-पोषण का संकट खड़ा हो गया है। इनकी होली की गुझियों की मिठास फीकी रह जाएगी।
परिषदीय स्कूलों में ये रसोइया न्यूनतम मानदेय 15 सौ रुपए में कार्य करने को विवश हैं। इनका दैनिक पारिश्रमिक 50 रुपये है। ज्यादातर रसोईया गरीब परिवार से या फिर विधवा होती हैं। स्कूलों में साफ-सफाई से लेकर खाना बनाना, बर्तन साफ करना आदि परिश्रम करती हैं। इसके बावजूद विभागीय अधिकारियों की घोर लापरवाही के चलते इनको 8 माह से मानदेय नहीं मिला है।
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विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इनका मानदेय शासन से सीधे खाते में आता है। रसोइयों को घर वाले ताने देने लगे अगर मानदेय नहीं मिल रहा है तो आप लोग काम क्यों कर रही हैं? वहीं सरकार महिला दिवस पर गोष्ठी के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर व सशक्तिकरण की बड़ी-बड़ी बातें कर समाज में महिलाओं के उत्थान की गुणगान करते हैं। होली का त्यौहार चंद दिनों बाद है, ऐसे में रसोइयों का मानदेय न दिये जाने से इनकी होली की खुशियां फीकी रहेंगी। महिलाओं की सशक्तीकरण की बात करने वाले जिम्मेदार मूकदर्शक बने हैं।
रिपोर्ट- पी०डी० गुप्ता