
राघवेन्द्र कुमार ‘राघव’-
खेती में लगातार घाटे के चलते जो गरीब किसान किसान क्रेडिट कार्ड का पैसा जमा नहीं कर पाए थे, इस कारण उनके खातों को एनपीए श्रेणी में शामिल कर दिया गया था । जब ऋणमाफी योजना को अमली जामा पहनाया गया तो ये एनपीए खाते सरकार और बैंक दोनों की प्राथमिकता सूची से बाहर ही रहे ।
सरकार की मंशा इस मामले में क्या रही यह तो वही जाने लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि एनपीए खातों को माफी का लाभ पहले मिलना चाहिए था । एक तो यह कि एनपीए बैंक का डूबा हुआ धन है और दूसरे अधिकांश एनपीए खाते वही हैं जो दीवालिया होने की कगार पर हैं । सरकार की ऋणमाफी योजना सतही तौर पर गरीबों को निराश और परेशान करती है । ऐसा ही एक मामला हरदोई जिले के कछौना विकास खंड के बालामऊ गांव का है जिसमें किसान अतुल कुमार तिवारी व उनके दिव्यांग भाई श्याम पुत्र स्व. सरयू प्रसाद को ऋणमाफी योजना में शामिल नहीं किया गया । जब श्याम ने बैंक ऑफ इंडिया शाखा कछौना के प्रबंधक से इस संबंध में जानकारी चाही तो उन्होंने कहा कि आपका खाता एनपीए है । आपको ऋणमाफी योजना का लाभ नहीं दिया जा सकता है क्योंकि हमें इस आशय की कोई सूचना नहीं मिली है । इसके बाद अतुल ने राष्ट्रपति महोदय, प्रधानमंत्री महोदय, मुख्यमंत्री महोदय और जिलाधिकारी महोदय हरदोई से शिकायत करते हुए एनपीए खातों को भी ऋणमाफी योजना में शामिल करने का अनुरोध किया है ।