आमजन की सोच है कि राजनीति दलदल है, कीचड़ है, ये अच्छे लोगों का काम नहीं। नेता का अर्थ वह व्यक्ति जिसका कोई दीन-ईमान नहीं होता। लोगों की इस सोच के कारण ही एक ईमानदार व्यक्ति, काबलियत होने के बावजूद राजनीति में प्रवेश करने से डरता है।लोगों को राजनीति के बारे में अपनी सोच में 180 डिग्री का (बिलकुल विपरीत) बदलाव करना ही होगा। जनता की अधिकतर जन-समस्याओं का मूल कारण राजनीति है। जिनका हल आम जनता की राजनीति में सक्रिय भागीदारी से ही निकलेगा, ना कि उससे बचकर भागने से। राजनीतिक दल और उनके नेता ये भली-भांति जानते हैं कि अगर जनता जाग गयी तो वो भ्रष्टाचार नहीं कर पाएंगे। फिर वो ‘पैसे से सत्ता और सत्ता से पैसे का खेल’ कैसे खेल पाएंगे। सरकारें राजनीतिक पार्टियों की बनती हैं इसलिए सरकारी नीतियां इन पार्टियों के दिशा-निर्देशों पर उनका हित साधने के लिए बनाई जाती हैं। जिसका फायदा बड़े-बड़े उद्योगपतियों को दिया जाता है, जो चुनाव जिताने में संबंधित राजनीतिक पार्टियों की फंडिंग करते हैं। ये राजनीतिक पार्टियां व उनके उम्मीदवार चुनावों में जनता से वोट लेने के लिए लोकलुभावन वायदे करते हैं। सरकारी योजनाएं दिखावे के लिए तो गरीब जनता के लिए होती हैं परन्तु इनका लाभ इन राजनीतिक पार्टियों के कार्यकर्ताओं को ही मिलता है। जरूरतमंदों को इनका लाभ मिल ही नहीं पाता। इनका पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है। अब विदेशों की तरह बड़ी मात्रा में टैक्स जनता से वसूले जाते हैं परन्तु जनता को विश्वस्तरीय सुविधाओं से वंचित रखा जाता है। अतः हमें यह सोचना होगा कि राजनीति एक स्वच्छ, पवित्र, समाज / राष्ट्र की भलाई के लिए परम आवश्यक कार्य है। यह कीचड नहीं, बल्कि एक स्वच्छ पानी की सरिता है। जिसमें सिर्फ और सिर्फ अच्छे लोग ही टिक सकते हैं। हमारे मंत्री, सांसद, विधायक ‘कोई राजा नहीं अपितु जनसेवक’ हैं। चुनावों में जनता हर बार ठगी जाती है। क्योंकि चुनाव घोषणा-पत्रों के माध्यम से राजनीतिक पार्टियों व उनके उम्मीदवारों द्वारा किये जाने वाले लोकलुभावन वायदे, उनके चुनाव जीतने के बाद जुमले ही साबित होते हैं। राजनीतिक पार्टियां उम्मीदवारों को टिकट देने के नाम पर अपने पार्टी-फंड में पैसा लेकर अपने चुनाव-चिन्ह को बेचती हैं। अधिकतर उम्मीदवार चुनाव जीतने पर भ्रष्टाचार के द्वारा अपने इस निवेश से कहीं अधिक धन की वसूली करते हैं।
ऑल इंडिया पार्टीलैस डेमोक्रेसी संगठन का मुख्य उद्देश्य है कि देश की आम जनता को जागरूक किया जाये जिससे चुनावों में वह अपने मताधिकार का सही उपयोग कर सके I इस संगठन का मानना है कि सभी राजनीतिक पार्टियां एनजीओ के रूप में ही कार्य करें। जनता के बीच से ईमानदार, कर्तव्यनिष्ठ, राष्ट्र / राज्य की जनता के लिए समर्पित सुयोग्य जनसेवकों को निर्दलीय चुनाव लड़ने के लिए आवश्यक संसाधन जुटाकर उनका सहयोग व समर्थन करके समाज-सेवा का कार्य करें। उम्मीदवार चुनावों में नितांत आवश्यकता से अधिक दान ना लें और ना ही अनावश्यक खर्चा करें।कोई भी राजनीतिक पार्टी व उसके उम्मीदवार, मतदाता को अपने प्रत्याशी के पक्ष में मतदान कराने के लिए धन इत्यादि का लोभ-लालच ना दें, इसे अपराध माना जाये। आपके समर्थन व सहयोग से जीते उम्मीदवार अब ‘जन-प्रतिनिधि’ व ‘जन-सेवक’ हैं अतः उन्हें संसद / विधान सभाओं / स्थानीय निकायों में अपनी बुद्धि, विवेक से, स्वतंत्र रूप से, अपना कर्त्तव्य निभाने दें। जीते उम्मीदवार सम्बंधित राजनीतिक पार्टी की सदस्यता से त्यागपत्र दें। संसद / विधान सभाओं / स्थानीय निकायों में कोई पक्ष व विपक्ष ना हों जिससे किसी भी मुद्दे पर इन संवैधानिक संस्थाओं (पूजनीय स्थलों) का बहिष्कार ना हो और जन-प्रतिनिधि परस्पर अभद्र व्यवहार ना करें। सभी निर्णय संबंधित विषय पर चर्चा कराकर मतदान द्वारा लिए जाएं।
सच्चे व ईमानदार लोकतंत्र की स्थापना के लिए चुनावों में 100% जनता की भागीदारी नितांत आवश्यक है। लोगों को जानना होगा कि चुने हुए प्रतिनिधियों के क्या कर्त्तव्य हैं, जिससे आम जनता को कोई मूर्ख ना बना सके। राजनीति करना सिर्फ राजनीतिक पार्टियों व उनके नेताओं का ही काम नहीं, बल्कि आप भी राजनीति मे सक्रिय भाग लें। आप देखेंगे कि आपकी कई समस्याओं का समाधान आपके राजनीति में सक्रिय भाग लेकर, वर्तमान व्यवस्थाओं में सुधार करके हो सकता है। हमारा यह मानना है कि देश में फैले भ्रष्टाचार की जड़ ये राजनीतिक पार्टियां ही हैं जिनकी गलत कार्यशैली की वजह से ईमानदार, योग्य, समर्पित समाजसेवी सरकार का हिस्सा नहीं बन पाते। ये पार्टियां योग्य गरीब व्यक्ति को टिकट नहीं देती।अतः आप इन राजनीतिक पार्टियों व उनके नेताओं की जन-कल्याणकारी नीतियों के समर्थक तो बनें परन्तु उनके अंधभक्त नहीं। क्योंकि अंधभक्त बनने से इनकी बुराइयां हमें दिखाई ही नहीं देती। कोई राजनीतिक पार्टी या उसका राजनेता हमारी सोच का नहीं है इसलिए उसकी अच्छी नीतियों का भी हम जानबूझकर विरोध ना करें।
अच्छे को अच्छा कहें और बुरे का विरोध करें। उसे वोट ना देने की नीति पर चलें। राजनीतिक पार्टियों के अंधभक्तों से बचें। ये कुल जनसँख्या का लगभग 5% होते हैं। ये प्रचार के विभिन्न हथकंडे अपनाकर बाकी 95% लोगों को गुमराह करते हैं। हमें ऐसे लोगों से बचना चाहिए। राजनीतिक पार्टियां व उनके नेता जनसेवा के नाम पर इन्हीं लोगों को फायदा पहुंचाते हैं। बहुत ताकत है हमारे वोट (मतदान) में, यह हमेशा गुप्त रहता है। यह पूरी सरकार / व्यवस्था को ही बदल सकता है। अतः आप बिना किसी डर के भली-भांति सोच समझकर ही मतदान करें। अगर आप चुनाव में खड़े सभी प्रत्याक्षियों में से किसी को भी पद पर चुने जाने के योग्य नहीं मानते हैं तो आप ईवीएम पर’नोटा’का बटन दबाएं। जिससे आने वाले समय में सभी राजनीतिक पार्टियां स्वच्छ छवि के उम्मीदवारों को ही टिकट दें। अगर ‘नोटा’ वाले मतों की संख्या, चुनाव में भाग लेने वाले उम्मीदवारों को अलग-अलग प्राप्त हुए मतों से अधिक होगी तो ऐसी स्थिति में चुनाव आयोग पर वह चुनाव निरस्त करके उसे दोबारा कराने का दवाब पड़ेगा।
हमें भ्रष्टाचार मिटाने के लिए, ‘व्यवस्था-परिवर्तन’ के लिए संघर्ष करना होगा। जनता के पास ‘वोट’ का हथियार है। जिसका वह उचित प्रयोग करके अपनी समस्याओं को हल करवा सकती है और स्वच्छ छवि के निर्दलीय प्रत्याक्षी को जिताकर ‘व्यवस्था-परिवर्तन’ कर सकती है। मतदाताओं को किसी राजनीतिक पार्टी द्वारा अथवा उनके किसी उम्मीदवार द्वारा चुनाव के समय उनके पक्ष में वोट देने के लिए दिए जाने वाले धन, उपहार, झूठे वायदों के प्रलोभन में नहीं फंसना चाहिए।क्योंकि चुनाव जीतने पर ये ही राजनीतिक पार्टियां और उनके उम्मीदवार चुनावों में खर्च किये गए धन की आपूर्ति भ्रष्टाचार द्वारा करते हैं। राजनीतिक पार्टियों व उनके उम्मीदवारों को भारतीय संविधान से हटकर जनता से अपने चुनाव घोषणा-पत्र में झूठे वायदे नहीं करने चाहियें। चुनावी वायदों के पूरा ना किये जाने पर जनता से ठगी करने के आरोप में उस राजनीतिक पार्टी की मान्यता व उम्मीदवार की सदस्यता रद्द की जानी चाहिए। मतदाताओं को राजनीतिक पार्टियों व उनके शीर्ष नेताओं और चुनाव चिन्ह को ध्यान में ना रख कर, स्वच्छ छवि के स्थानीय जनसेवक उम्मीदवार को ही अपना वोट देना चाहिए। किसी पैराशूट उम्मीदवार को नहीं। उम्मीदवार चुनाव प्रचार के समय एक ‘शपथ-पत्र’ दें। जो आम जनता और चुने हुए प्रतिनिधि के बीच एक ‘कॉन्ट्रैक्ट’ के रूप में हो, जिससे चुना हुआ जन-प्रतिनिधि जनता की बात सुने और उनकी जन-समस्याओं का समाधान करे। उम्मीदवार ‘शपथ-पत्र’ की कॉपी हमारे कार्यालय से प्राप्त कर सकते हैं और इसकी शर्तों पर अपनी सहमति जताकर, अपने चुनावी प्रचार में, अपने क्षेत्र की जनता को, अपने पक्ष मे मतदान करने के लिए आश्वस्त कर सकते हैं।
जनता से निवेदन है कि वह चुनाव प्रचार कर रहे उम्मीदवारों से ये प्रश्न अवश्य करें:- आप चुनाव क्यों लड़ना चाहते हैं? आपने अपने चुनाव क्षेत्र में ‘जनसेवा’ के नाम पर क्या कार्य किये हैं? जनता आपको अपना अमूल्य वोट क्यों दे? इसकी क्या गारंटी है कि आप चुनाव जीत जाने पर भ्रष्टाचार में लिप्त नहीं होंगे? यह गारंटी आप जनता को कैसे देंगे? अगर आप चुनाव जीत जाने पर आपके द्वारा आपके चुनाव घोषणा-पत्र में किये गए वायदे पूरे नहीं किये जाते तो क्या आपके इस कृत्य को जनता से ठगी माना जाये और क्यों ना जनता से ठगी के जुर्म में आपको अपराधी घोषित करके कानूनी सजा दी जाए? क्या आप अपने क्षेत्र की जनता को विश्वास दिलाने के लिए कोई लिखित कॉन्ट्रैक्ट / संविदा शपथ-पत्र के रूप में देंगे?
अगर आपको अपनी जन-समस्याओं का समाधान करना है तो राजनीतिक प्रदूषण को समाप्त करने के लिए –
राजनीति नहीं राष्ट्रभक्ति करें, राजनेता नहीं योग्य जन-सेवक चुने। भ्रष्टाचार मिटाने के लिए पैसे के रूप में पार्टी-फंड के लिए ना दान चंदा लें, ना ही दान चंदा दें। चुनावी उम्मीदवारों से, जनता की शर्तों का हस्ताक्षर सहित शपथ-पत्र (जो हमारे पास उपलब्ध है), जनता को देने को कहें। जिससे वो उम्मीदवार चुनाव जीतने पर क्षेत्र की जनता की जन-समस्याओं का समाधान करे और उसके लिए आवश्यक जन-सुविधाएं भी उपलब्ध कराये।
विमल कुमार सक्सैना, संस्थापक एवं राष्ट्रीय संयोजक,
ऑल इंडिया पार्टीलैस डेमोक्रेसी संगठन दिल्ली I
मोबाइल: 9818353621, 9910314907.