बताते चलें कि हाल में ही लिए गले फैसलों के आधार पर ट्रस्ट सम्बन्धी वार्तालाप कानो कान सभी ग्रामीणों तक पहुंचने की वजह से पट्टीदारी के ही नहीं अपितु सम्पूर्ण ग्रामवासियो में ख़ुशी की लहर है. ग्रामीणों का कहना है की बढती हुयी जनसंख्या से सार्वजनिक स्थल पर भवन इत्यादि बनने से लोगो को छोटे कार्यक्रम करने में बहुत परेशानी होने लगी थी इसलिए देवतन बाबा (शक्ति पीठ) मंदिर ट्रस्ट बनने पर इस मंदिर ट्रस्ट में वे कोई भी कार्यक्रम कर सकेंगे। इसक्रम में लोगो का विचार प्रसाशन की ओर दिए गए आश्वासन की ओर आकर्षित होने लगे है। बताते चले की वर्षों पुरानी इस सार्वजनिक मंदिर के होने का दावा कब्जा धारी ओम प्रकाश त्रिपाठी आदि भी स्वीकार कर रहे हैं। एक स्वर में मंदिर के अस्तित्व को स्वीकार करने की वजह से इस कॉरिडोर परिसर के बनने में कोई बाधा नहीं प्रतीत होती है।
अब रही बात कब्जा धारियों ओम प्रकाश आदि का कब्जे को हटाने के सन्दर्भ में क्या कोई विधिक बाधा हो रही है? इस पर विशेषज्ञों की राय है की ओम प्रकाश आदि का कब्जा आबादी भूमि और ग्राम सभा की नवीन परती भूमि पर है जिसे मंदिर ट्रस्ट के नाम से मुक्त कराने में कोई समस्या प्रतीत नहीं होती क्योकि देवतन बाबा, शक्ति पीठ मंदिर के आबादी भूमि पर बना होने के कारण मालिकाना हक़ मंदिर के देवता को जाता है न की मंदिर के पुजारी या अन्य को. इस सन्दर्भ में माननीय सुप्रीम कोर्ट का एक महत्त्वपूर्ण फैसला है जिसमे दो जजों की खंडपीठ ने यह महत्त्वपूर्ण फैसला सुनाया था। इसके बाद नवीन परती की भूमि जिस पर बात चल रही है मंदिर परिसर विस्तारीकरण की, ग्राम सभा की भूमि होने के कारण भू प्रबंध समिति द्वारा मंदिर ट्रस्ट के नाम से यह संपत्ति दान कर दी जायेगी जिससे परिसर के निर्माण में कोई बिधिक बाधा नहीं होगी।