मैंने देखा वक्त में
शाम और सुबह की झलक
सुबह मंदिरों की घण्टियों के आवाज
शाम सीढ़ियों पर बैठे कुछ करुनानिधान
प्रतिबिम्ब सब देव के सबके रचे प्रतिमान
पुष्प अर्पित कर चले जब, पांव से लिपट कर मांगे सजल भवनिधान
जीवन के कुछ रचे स्वयं विधान
एक तस्वीर के साथ ।
आकांक्षा मिश्रा