एक आह्वान : आओ! उठो! एक अभिनव अभियान के साक्षी बनें

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय


आओ!
आकाश को उतार लें,
इस धरती पर।
क्षितिज को बाँध लें,
अपनी मुट्ठी में।
सूरज को उगा लें,
अपनी हथेली पर।
सागर को सिमटा लें,
अपनी आँखों में।
पर्वत को बो दें,
अपने सीने में।
शौर्य और साहस का
धीर-गम्भीर चरित्र
कभी मरने न पाये।
आओ! उठो!
एक अभिनव अभियान के साक्षी बनें।
(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, इलाहाबाद; ६ जनवरी, २०१९ ई०)