उपासना पाण्डेय ‘आकांक्षा’, हरदोई (उत्तर प्रदेश)
मेरा क्या अस्तित्व होता ,
अगर आप जैसा पिता मुझे न मिलता,
हर ज़िद को पूरा किया,
हर पल मेरी खुशियों का ख्याल रखा ।
आप परेशान होते हो,
क्यूँ कुछ नहीं कहते हो ?
हर तकलीफ अकेले सहते हो,
मैं बेटी हूँ आपकी तो क्या हुआ,
आपकी हर तकलीफ समझती हूँ ।
हमे भी तकलीफ होती है,
हर वक़्त हमारी खुशियों के लिए,
कितनी मेहनत करते हैं,
न सुकून की नींद,
न कभी आराम किया ।
हर अच्छे पिता के जैसे हो,
दुनिया क्या कहती है,
कोई फर्क नहीं मुझको,
आप ही हमारा संसार हो,
आप ही हमारी दुनिया हो,
हर मुश्किल में आपके साथ हूँ ।
हर परिस्थिति को समझना ,
इतना आसान नहीं,
मगर मैं क्यों भूल जाऊं,
जब मेरी हर खुशी का ख्याल,
आपने रखा ।
तो फिर क्यूं सुनूं मैं लोगो की बकवास,
दुनिया ने क्या साथ दिया था ,
एक मजबूत सा इंसान जो खुद टूट कर बिखर गया,
मगर कभी हमे टूटने नही दिया ।
धन्यवाद उस भगवान का,
जिसने मुझे आप जैसा पिता दिया ।।