सई नदी की करुण कथा : पौराणिक और ऐतिहासिक नदी मर रही है

वो लड़की

उसकी खनकती हंसीं में छिपी हैं
राज वर्षों की ,
कहती नहीं ,सहती नहीं रखती नहीं ।

बात कुछ दिल में
कई दिनों से पूछा करती हैं
हाल वो अपने जी का~
चुपके -चुपके करती हैं प्यार वह उसको ।

पूछती हूँ ,
छिपा लेती नाम उसका ,बयां सदियों
का उसका इजहार न हुआ
अकेले में रो देती हैं याद कर उसको ।

तू प्यार के पहले पड़ाव में चल रही हैं
चल धीरे-धीरे तू साथ उसके
खूबसूरत सफर होगा , चूड़ियों की खनकती ~
मधुर ध्वनि करेगी राग धीरे-धीरे ।


डॉ० आकांक्षा मिश्रा