उन्हें क्या ? वो तो राजनीति का खेल खेल रहे हैं

शिवांकित तिवारी ‘शिवा’, युवा कवि/लेखक  सतना (मध्यप्रदेश) संपर्क:-7509552896

आज हम आरक्षण का दंश झेल रहे हैं,

उन्हें क्या ? वो तो राजनीति का खेल खेल रहे हैं ।

कुर्सी पर बैठ नचा रहे हैं जनता को,

जो उठा रहा है हित के लिए आवाज़,

उसको भेज जेल रहे हैं,

उन्हें क्या ?वो तो राजनीति का खेल खेल रहे हैं ।

हर बार विकास के नाम पर वोट ले जाते हैं,

फिर पांच सालों तक ना अपनी शक्लें दिखाते हैं,

कभी राम मंदिर, कभी आरक्षण,

कभी सेनाओं को मुद्दा बनाते हैं,

हर बार जनता को मुद्दों के नाम पर कर ब्लैकमेल रहे हैं,

उन्हें क्या ? वो तो राजनीति का खेल खेल रहे हैं ।

जनता को मिलता नहीं कुछ

सिवाय झूठे वादों और आश्वासन के,

भरते है सिर्फ अपनी जेबें अपने पांच सालों के शासन में,

घोषणाएं लाखों करते अपने घोषणापत्रों और भाषणों में,

खुलेआम दंगे करा जनता को मौत के कुएं में ढकेल रहे हैं,

उन्हें क्या ? वो तो राजनीति का खेल खेल रहे हैं ।

जातिगत भेदभाव का हर जगह बोया है जहर,

आरक्षण आज अभिशाप है हर गली हर शहर,

निकाल लेते हैं वो चुनाव बनाकर इसी की लहर,

उनको क्या हर बार पैसे लूट वो रेलमपेल रहे हैं,

उन्हें क्या ?वो तो राजनीति का खेल खेल रहे हैं ।