कोरोना काल में ब्रांड मोदी की लोकप्रियता कम हुई!

सुधान्शु बाजपेयी (प्रवक्ता उप्र कांग्रेस)

सुधान्शु बाजपेयी (युवा पत्रकार/चिन्तक)-

आज लगभग सभी चैनल्स और अखबारों में यह खबर प्रमुखता से छपी है की कल दिल्ली में पीएम मोदी, भाजपा और संघ के शीर्ष नेताओं के बीच एक बैठक हुई। प्रथम दृष्टया हमें लगा कि शायद सरकार तीसरी लहर को लेकर गंभीर हो और उसकी तैयारी के संबंध में कोई बैठक की होगी। मगर हमारा सोचना गलत सिद्ध हुआ, लेकिन मणिशंकर अय्यर जी की टिप्पणी एक बार फिर सही साबित हुई। सरकार और संघ की चिंता यह है कि कोरोना काल में ब्रांड मोदी की लोकप्रियता कम हुई है, जबकि उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव आने वाले हैं।

इनको इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता की कोरोना की दूसरी लहर में लगभग 3 लाख लोग मारे गए। आने वाली कोरोना की तीसरी लहर इससे भी भयानक है जो बच्चों के लिए और भी घातक सिद्ध होगी। करुणा की इस दूसरी लहर से पहले मार्च में ही वैज्ञानिकों के फोरम ने सरकार को चेतावनी दी थी कि कोरोना की दूसरी लहर बेहद भयावह साबित होने जा रही है इसलिए सरकार पहले से ही तैयारी रखें। मगर पीएम मोदी सहित पूरी सरकार बंगाल चुनाव में व्यस्त थी। मोदीजी तब भीड़ को देखकर आह्लादित होते दिखे मगर वह भीड़ जब लाशों में तब्दील हुयी, सरकार सोती रही।

जब गंगा के तट लाशों से भर गए, गाँवो में अंतिम संस्कार के लिए लकड़ियाँ कम पड़ गईं, तब लाखों लोगों की मौत इनके लिए एक तमाशा भर है, जब जरूरत थी तब सरकार सो रही थी, जब संक्रमण की रफ्तार कम होती है तब आँसू बहाते हैं। तब इन्हें घड़ियाली आंसू क्यों न कहा जाए ?

सरकार की प्राथमिकता महामारी से लड़ना नहीं बल्कि चुनाव लड़ना है। जहां इस पूरी महामारी के दौर में अव्यवस्था के लिए सिस्टम को जिम्मेदार ठहरा कर सरकार ब्रांड मोदी को बचाना चाहती है । इन्हें जो तीन लाख लोग मर गये उनकी नहीं अपनी इमेज की चिंता है और कांग्रेस से यही दिक्कत कि मोदीजी की इमेज क्यों डेंट कर दे रहे ? इस सिस्टम के जिम्मेदार मोदी की पोल क्यों नहीं खोल देते हैं ?