कोथावाँ प्रा०वि० का हाल, बच्चों को दूध और फल नहीं दे रहे जिम्मेदार

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्‍या पर प्रथम सम्बोधन में राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद की देश से गरीबी मिटाने की अपील

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्‍या पर राष्‍ट्र को पहली बार संबोधित करते हुए राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने देश से गरीबी मिटाने की अपील की है । श्री कोविंद ने कहा कि आज भी बहुत से देशवासी सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े हुए हैं । वे गरीबी में अपनी जिंदगी गुजार रहे हैं । हमारे लोकतंत्र का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य उनकी बुनियादी ज़रूरतों को पर्याप्त मात्रा में पूरा करना और विकास के अवसर निरंतर प्रदान करते रहना है । श्री कोविंद ने गरीबी के अभिशाप को कम से कम समय में जड़ से समाप्‍त करने का आह्वान किया । राष्‍ट्रपति ने कहा कि गरीबी उन्‍मूलन हमारा परम कर्तव्‍य है और हमारा गणतंत्र इससे कोई समझौता नहीं कर सकता । हमें सतत विकास लक्ष्‍य की ओर तेजी से बढ़ना होगा जिससे देश में गरीबी और उन्‍मूलन, सभी को बेहतर शिक्षा और स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाएं, बच्चियों को सभी क्षेत्रों में समान अवसर प्रदान करने के पथ पर हम आगे बढ़ सकें ।

इसके बाद श्री कोविंद ने कृषकों के जीवन में सुधार लाने की आवश्‍यकता पर जोर देते हुए कहा कि किसान एक अरब लोगों का पेट भरने के लिए जी-जान से जुटे रहते हैं । उन्होंने किसानों के जीवन को सुखमय बनाने की बात कही ।

राष्‍ट्रपति ने देश के विकास के लिए सामरिक विनिर्माण क्षेत्र के निरन्‍तर आधुनिकीकरण की बात करते हुए कहा कि हमें सामरिक विनिर्माण क्षेत्रको सुदृढ़ बनाना होगा । जिससे सशस्‍त्र सेनाओं, पुलिस तथा अर्धसैनिक बलों के वीर जवानों को वे उपकरण मिल सकें जिनकी उन्‍हें आवश्यकता है ।

राष्‍ट्रपति ने भारतीय शिक्षा प्रणाली को 21वीं सदी की डिजिटल अर्थव्‍यवस्‍था, जीनोमिक्‍स, रोबोटिक्‍स और ऑटोमेशन की वास्‍तविकताओं के अनुसार प्रासंगिक बनाने के लिए उसमें सुधार, उन्‍नयन और विस्‍तार पर जोर दिया । उन्‍होंने कहा कि देश ने साक्ष्‍ारता के प्रसार में काफी प्रगति की है और अब देश को शिक्षा और ज्ञान की सीमाओं का विस्‍तार करना होगा ।

बालिका शिक्षा का उल्‍लेख करते हुए श्री कोविंद ने कहा कि एक सुखी और समान अवसर वाला राष्‍ट्र, ऐसे परिवारों से बनता है, जहां बालिकाओं को बालकों जैसे ही अधिकार, शिक्षा और स्‍वास्‍थ्‍य की सुविधाएं प्राप्‍त होती हैं । महिलाओं को न्याय दिलाने के लिये सरकार कानून लागू कर सकती है और नीतियां भी बना सकती है । लेकिन ऐसे कानून और नीतियां तभी कारगर होंगे जब परिवार और समाज हमारी बेटियों की आवाज को सुनेंगे । हमें परिवर्तन की इस पुकार को सुनना ही होगा ।

फिल्‍म पद्मावत पर जारी गतिरोध और विरोध पर श्री कोविंद ने कहा कि सभ्‍य राष्‍ट्र का निर्माण, ऐसी सोच के वातावरण से होता है, जहां कोई भी अन्‍य नागरिक के सम्‍मान और व्‍यक्तिगत स्‍वतंत्रता का मजाक उड़ाए बगैर उसके दृष्टिकोण से असहमत हो सकता है । फिल्‍म पद्मावत सहित विभिन्‍न मुद्दों पर हाल में हो रहे विरोध प्रदर्शनों की ओर संकेत करते हुए श्री कोविंद ने कहा कि सभ्‍य सोच वाले व्यक्ति अन्य लोगों की व्‍यक्तिगत निजता और अधिकारों का सम्‍मान करते हैं ।

राष्‍ट्रपति ने कहा कि भारत की राष्‍ट्र निर्माण परियोजना का सर्वोच्‍च चरण एक ऐसा बेहतर विश्‍व बनाने का है जो प्रेम और भाईचारे से भरा हो और जिसका अपने साथ और प्रकृति के साथ भी संबंध शांतिपूर्ण हो । श्री कोविंद ने कहा कि जरूरतमंदों की सहायता और पड़ोसियों की क्षमताओं का निर्माण हमारे समाज की विशेषता है । वर्ष 2020 में हमारे गणतन्त्र को 70 वर्ष हो जाएंगे। 2022 में, हम अपनी स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ मनाएंगे । ये महत्वपूर्ण अवसर हैं । स्वतंत्रता सेनानियों और संविधान के निर्माताओं द्वारा दिखाए रास्तों पर चलते हुए, हमें एक बेहतर भारत के लिए प्रयास करना है । राष्‍ट्रपति ने कहा कि एक लम्‍बे संघर्ष के बाद हमें स्‍वतंत्रता प्राप्‍त हुई, और इसमें लाखों लोगों ने भाग लिया । राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी के जीवन से प्रभावित होकर लोगों ने अपना सब कुछ देश के लिए न्‍यौछावर कर दिया। राष्‍ट्रपति कोविंद ने कहा कि हमारा स्‍वप्‍न है कि भारत एक विकसित देश बने । उन्‍होंने कहा कि आवश्‍यकता इस बात की है कि देश का युवा वर्ग अपनी आकांक्षाओं, कल्‍पना और आदर्शो के अनुसार भारत को आगे और आगे ले जा सके ।

हम सबका सपना है कि भारत एक विकसित देश बने । उस सपने को पूरा करने के लिए हम आगे बढ़ रहे हैं। हमारे युवा अपनी कल्पना, आकांक्षा और आदर्शों के बल पर देश को आगे ले जाएंगे । मैं एक बार फिर आप सभी को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं, और आप सभी के उज्ज्वल और सुखद भविष्य की मंगल-कामना करता हूं ।

धन्यवाद
जय हिन्द!