प्रधानमंत्री ने अहमदाबाद में राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय का भवन राष्ट्र को समर्पित किया और अपना पहला दीक्षांत भाषण दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि “अंग्रेजों के अन्याय के खिलाफ गांधी जी के नेतृत्व में जो आंदोलन चला, उसने अंग्रेजी हुकूमत को हम भारतीयों के सामूहिक सामर्थ्य का एहसास करा दिया था। एक धारणा विकसित की गई थी कि हमें वर्दीधारी कर्मियों से सावधान रहना होगा। लेकिन अब यह बदल गया है। जब लोग अब वर्दीधारी कर्मियों को देखते हैं तो उन्हें मदद का आश्वासन मिलता है। देश के सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए तनाव मुक्त प्रशिक्षण गतिविधियां समय की आवश्यकता है।”
उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे मानवता के मूल्यों को हमेशा अपनी वर्दी के अभिन्न अंग के रूप में रखें और अपने प्रयासों में सेवा भावना की कभी कमी नहीं होने दें। उन्होंने सुरक्षा के क्षेत्र में लड़कियों और महिलाओं की बढ़ती संख्या पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “हम रक्षा क्षेत्र में महिलाओं की अधिक भागीदारी देख रहे हैं। विज्ञान हो, शिक्षा हो या सुरक्षा, महिलाएं आगे बढ़कर नेतृत्व कर रही हैं।”
इस अवसर पर गुजरात के गवर्नर, आचार्य देवव्रत जी, गृहमंत्री श्री अमित शाह, मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल, राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटीज़ के वाइस चासंलर, विमल पटेल जी, ऑफिसर्स, टीचर्स, यूनिवर्सिटी के छात्रगण, अभिभावक गण, अन्य महानुभाव उपस्थित रहे।