प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश में बाघों की स्थिति से संबंधित एक रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट के अनुसार, देश में बाघों की संख्या बढ़कर तीन हजार एक सौ सड़सठ हो गई है। श्री मोदी ने बाघों के संरक्षण के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय गठबंधन की शुरूआत की और बाघ परियोजना पर एक स्मारक-सिक्का भी जारी किया। उन्होंने कहा कि बाघ परियोजना विश्व के लिए गर्व का विषय है।
प्रधानमंत्री ने आज मैसूरु में आज बाघ परियोजना के 50 वर्ष पूरे होने के अवसर पर कहा कि देश के कई समुदायों में प्रकृति और बाघों के संरक्षण की संस्कृति है।
प्रोजेक्ट टाइगर को 50 वर्ष हो गए हैं। प्रोजेक्ट टाइगर की सफलता भारत के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व के लिए गौरव का विषय है। भारत ने टाइगर को न सिर्फ बचाया है बल्कि उसको फलने-फूलने का एक बेहतरीन इकोसिस्टम दिया है। ये हम लोगों के लिए और भी सुखद हैं कि जिस समय हमने अपनी आजादी के 75 वर्ष पूरे किए हैं। उसी समय दुनियां की करीब-करीब 75 पर्सेंट पॉपुलेशन भारत में ही है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में 75 वर्ष के अंतराल के बाद चीते का जन्म होना इस बात का प्रमाण है कि देश में जैव-विवधिता बढ़ रही है।
आज प्रधानमंत्री जी ने बाघ के जनसंख्या की जानकारी से जुड़े रिपोर्ट का अनावरण किया। इसके अनुसार बाघ की जनसंख्या देश में 2018 और 22 के बीच 200 की बढ़ोत्तरी हुई है। 2010 में बाघों की संख्या एक हजार चार सौ 11, 2014 में दो हजार दो सौ 26, 2018 में दो हजार नौ सौ 67 और 2022 में तीन हजार एक सौ 67 रही। आज प्रधानमंत्री द्वारा इन्टरनेशनल बिग कैट अलाइन्स का उद्घाटन भी हुआ। जिसके अनुसार आठ प्रकार के बाघ और शेरों की जाति से जुड़े जनवरों की रक्षा में वैश्विक सहयोग कायम होगा।