राहुल गांधी! एक करोड़ नौकरियाँ कहाँ से लाओगे?

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
(प्रख्यात भाषाविद्-समीक्षक)

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय


कर्नाटक-विधानसभा-चुनाव के प्रसंग में तुमने भी ‘श्री-श्री १००८ फेंकूदास झाँसाराम स्वामी’ के पगचिह्नों का अनुसरण करते हुए, अपने बावन पृष्ठीय चुनावी घोषणापत्र में ‘कर्नाटक के एक करोड़ युवाओं को नौकरी’ देने की बात कही है। कहीं ऐसा तो नहीं, अँगरेज़ी-शिक्षा-दीक्षा के प्रभाव के कारण तुम्हें इकाई-दहाई का गणितीय संज्ञान न हो अथवा शून्य के संजाल में तुम कुछ आगे-पीछे फँस गये हो।

बेशक, काग़ज़ पर एक करोड़ नौकरियों का आकर्षण नौकरी पाने की आस में टकटकी लगायीं पथराई आँखों को आश्वस्त करता प्रतीत होता है; परन्तु व्यवहार के धरातल पर उसका क्रियात्मक पक्ष नितान्त दुर्बल लक्षित होता है।

तुमने कहा है, “यह घोषणापत्र कर्नाटक की जनता की आवाज़ है।” कहीं ऐसा तो नहीं, तुम अपने घोषणापत्र को जनता की आवाज़ का नाम देकर जनता की भावनाओं के साथ क्रूर छल करने जा रहे हो? तुम्हारा काँग्रेस-दल यदि पुन: वहाँ सत्तासीन होता है तो एक करोड़ नौकरियाँ कहाँ से लाओगे? क्या तुमने रायबरेली, अमेठी या फिर इटली में नौकरियाँ तैयार करने की कारख़ाना खोल रखी है? नौकरियों को तुम और तुम्हारे दल के ‘अतिरिक्त जानकार अर्थशास्त्री’ पेड़ पर लटके फल की तरह से देख रहे हैं; डालियाँ झुकायीं और फल हाथ में।

तुम्हारे इस असम्भाव्य घोषणा से तुम्हारी राजनीतिक दृष्टि का धुँधलापन और अपरिपक्व अनुभव का दर्शन होता है। तुम भी उसी पंक्ति में कर्नाटक-राज्य के मतदाताओं के समक्ष ‘कटोरा’ लेकर प्रस्तुत हो, जिस पंक्ति में ‘श्री-श्री १००८ फेंकूदास झाँसाराम स्वामी ऐण्ड कम्पनी’ वर्ष २०१४ से अब तक प्रस्तुत है।

तुम अभी राजनीति की ‘ककहरा’ की दीक्षा अर्जित कर रहे हो; तुम्हें अभी बहुत-कुछ अर्जित करना है; तुम तभी आगे बढ़ पाओगे जब अपने बल पर ही राजनीति के आँगन में ठुमकते हुए बढ़ोगे।

अब देश के मतदाता पहले की तुलना में चतुर और सुजान हो चुके हैं। तुम्हारे राजनीतिक स्वास्थ्य के लिए अत्युत्तम यही रहेगा कि वही कहो, जो कर सको, अन्यथा जिस तरह से ‘श्री-श्री १००८ फेंकूदास झाँसाराम स्वामी’ देश की जनता को तरह-तरह के आकर्षक-अभिनव सब्ज़बाग़ दिखाने के बाद अब सब कुछ भूलकर विदेश भागता फिर रहा है, तुम भी ‘इटली’ भागते नज़र आओगे और देश की जनता की गालियाँ खाते रहोगे।

(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, इलाहाबाद; २८ अप्रैल, २०१८ ई०)