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डॉ० रामनरेश त्रिपाठी के रूप में ‘अध्यात्मज्ञान’ का एक स्तम्भ ढहा!

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

इधर, कुछ दिनों के भीतर ही प्रयागराज के अनेक क्षेत्रों में यशस्विता के साथ कर्म करनेवाले हस्ताक्षर इस संसार से जा चुके हैं। उसी शृंखला में आज (३ मई) अध्यात्म, ज्योतिष, पत्रकारिता तथा शिक्षा के प्रमुख स्तम्भ डॉ० रामनरेश त्रिपाठी का प्रयागराज के एक निजी चिकित्सालय में कोरोना से निधन होना, हम सभी के लिए फ़िलहाल, एक अपूरणीय क्षति है। हमारे समस्त सारस्वत आयोजनों में प्राथमिकता के साथ एक कुशल संरक्षक के रूप में डॉ० रामनरेश त्रिपाठी की भागीदारी रहती थी। उन्हें देवरहा बाबा और प्रभुदत्त ब्रह्मचारी का सान्निध्य, विशेषत: प्राप्त था।

स्मृति-शेष डॉ० रामनरेश त्रिपाठी जी का अध्यात्मज्ञान प्रतिष्ठा का विषय था। सहज व्यक्तित्व के धनी और हम सभी शब्दधर्मियों के साथ अग्रसर की भूमिका-निर्वहण करनेवाले डॉ० त्रिपाठी की यशस्विता का स्मरण करते हुए, ‘सर्जनपीठ’, प्रयागराज की ओर से एक शोकसभा का आयोजन किया गया, जिसमें हिन्दी साहित्य सम्मेलन के प्रधानमन्त्री विभूति मिश्र, समालोचक विभूराम मिश्र, साहित्यकार डॉ० प्रदीप चित्रांशी, सहायक प्राध्यापक डॉ० रवि मिश्र, प्रधानाचार्य डॉ० पूर्णिमा मालवीय, कलाविद् नीतू सिंह, अधिवक्त्री डॉ० प्रतिभा सिंह, स्वतन्त्र पाण्डेय, प्रकाशक आलोक चतुर्वेदी आदिक प्रबुद्धजन ने अपनी शोक-संवेदना व्यक्त की। समारोह का आयोजन आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने किया था।

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