‘हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग’ की ओर से आगामी १२-१३ मार्च को आयोजित किये जानेवाले द्विदिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन की कार्ययोजना के संदर्भ मे ८ मार्च को सम्मेलन के प्रधानमन्त्री-कार्यालय मे एक पत्रकार-वार्त्ता का आयोजन किया गया। लगभग एक घण्टा तक चली उस बैठक मे पत्रकारों ने हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अधिवेशन के उद्देश्य पर अनेक प्रश्न किये थे, जिनके उत्तर देते हुए सम्मेलन-प्रधानमन्त्री विभूति मिश्र ने बताया, “यथाशक्य हिन्दी-भाषा, साहित्य, लोक-जनजातीय भाषा-बोली-कला-संस्कृति आदिक का बहुविध संवर्द्धन होता रहे और हमारा सम्मेलन इस दिशा मे अपनी महती भूमिका का निर्वहण करता रहे, यही अधिवेशन का उद्देश्य है। हम अधिवेशनो के माध्यम से विविध विषयों पर देवनागरी लिपि और हिन्दीभाषा मे विषय-विशेषज्ञों के व्याख्यान आयोजित करते हैं और अन्तिम दिन अधिवेशन से सम्बन्धित प्रस्तावों को सार्वजनिक करते हुए, उन्हें पारित कर विचारार्थ शासन के पास भेजते हैं।
इसी अवसर पर सम्मेलन की ओर से निमन्त्रित भाषाविज्ञानी और समीक्षक आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने बताया, “सम्मेलन की ओर से अब तक सफलतापूर्वक बहत्तर वार्षिक राष्ट्रीय अधिवेशन कराये जा चुके हैं। आगामी १२-१३ मार्च को प्रयागराज मे आयोजित किये जानेवाले इस चौथे अधिवेशन का उद्घाटन अपराह्न ५ बजे से होगा, जिसमे अधिकतर राज्यों, विशेषत: अहिन्दीभाषाभाषी राज्यों– आन्ध्रप्रदेश, कर्नाटक, केरल, तेलंगाना, तमिलनाडु, गुजरात, महाराष्ट्र, हिमाचलप्रदेश, चण्डीगढ़, पंजाब के प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी रहेगी।”
सम्मेलन के प्रबन्धमन्त्री कुन्तक मिश्र ने बताया, “इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० नागेश्वर राय के सभापतित्व मे यह तिहत्तरवाँ राष्ट्रीय अधिवेशन होगा, जिसमे उत्तरप्रदेश की राज्यपाल महामहिम आनन्दीबेन पटेल की मुख्य अतिथि के रूप मे ‘वर्चुअल’ उपस्थिति रहेगी।”
वरिष्ठ सम्मेलनकर्मी शेषमणि पाण्डेय ने सम्मेलन के राष्ट्रीय अधिवेशनो की ऐतिहासिक जानकारी दी।
इस अवसर पर प्रयागराज के प्रमुख हिन्दी-दैनिक समाचारपत्रों के संवाददाता और छायाकार उपस्थित थे, जिन्हें सम्मेलन की ओर से दैनन्दिनी, शोधपत्रिका ‘सम्मेलन त्रैमासिक’, पाक्षिक ‘राष्ट्रभाषा सन्देश’ की एक-एक प्रति भेंट की गयी थी।